
thinking
लोग अक्सर कहते हैं कि अगर सोचना ही है तो कुछ बड़ा सोचो। यह बात कुछ हद सही भी है लेकिन एक खेमा ऐसा भी है जो यह कहता है कि बड़ी सोच आपको आगे बढऩे से रोक भी सकती है। इसमें कोई शक नहीं कि बड़ी सोच का सकारात्मक पलड़ा भारी है लेकिन कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं, जिन्हें नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अगर आप नहीं चाहती कि बड़ी सोच आपके पैरों की बेडिय़ां बनकर आगे बढऩे से न रोके तो आपको कुछ बातों पर जरूर गौर करना होगा। इससे आप न केवल तनाव का शिकार होने से बचेंगी, बल्कि अनावश्यक दबाव भी महसूस नहीं करेंगी।
पंचतंत्र की वह कहानी आपने सुनी होगी, जिसमें एक ब्राह्मण अपने सपनों की मटकी को लात मारकर तोड़ देता है। इससे समझा जा सकता है कि छोटे लक्ष्य तय करते हुए मंजिल हासिल करना ही समझदारी है।
ज्यादा सोचना आपके कदम थाम सकता है
बड़ी सोच के चक्कर में कई बार आप बहुत ज्यादा सोचने पर मजबूर हो सकती हैं। न केवल आप छोटी-छोटी बारीकियों के बारे में सोचने लगती हैं, बल्कि सोच-विचार में अपना काफी समय भी गुजार देती हैं, जिससे आप के दिमाग पर बोझ बढऩे लगता है। ऐसे में आपकी कार्यक्षमता भी प्रभावित होने लगती है क्योंकि आप अपने लक्ष्य पर फोकस नहीं कर पातीं।
यह बड़ी नाकामी की वजह भी बन सकती है
यह सही है कि बड़ी सोच आपको बड़ी जीत दिला सकती है लेकिन यह भी सही है कि केवल सोच को बड़ा करने से सफलता नहीं मिलेगी। कई बार यही सोच बड़ी नाकामी की वजह भी बन सकती है और आप औंधे मुंह गिर सकती हैं। यह आपको जल्दबाजी करने या गलत दिशा में आगे बढऩे के लिए मजबूर कर सकती है।
पहुंच से बहुत दूर हो सकती है यह सोच
कई बार हम बड़े सपने पूरे करने के लिए बड़ा सोचते हैं। यह सोच बहुत आगे की होती है, जिसकी वर्तमान में प्रासंगिगता नहीं होती। यह कमजोर निर्णयों और फिर नाकामी का कारण बनती है। इसमें कोई शक नहीं कि भविष्य के लिए लक्ष्य तय करके आगे बढऩा समझदारी है लेकिन वर्तमान में इसे लेकर ज्यादा सोचना सही नहीं है क्योंकि यही सोच आपका आगे बढऩा मुश्किल भी कर सकती है।
Published on:
15 Dec 2017 02:14 pm
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