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स्त्री को खिलौना समझने की भूल न करें

मन बहलाव का जरिया समझने वालों को चेतावनी

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Sunil Sharma

May 06, 2018

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स्त्री को सदैव मन बहलाव का जरिया समझने वालों को यह चेतावनी है। जी हां दुष्कर्मियों और यौनाचारियों पर तब अदालत का डंडा पड़ता है तो ऐसी चेतावनी उनके ठीक समझ आनी चाहिए। बरसों से महिलाओं के साथ दोयम दर्जे का बर्ताव किया जाता रहा है। कभी घर परिवार में ही तो कभी घर के बाहर यौन शोषण का शिकार होने वाली महिलाओं को जब अदालत से राहत मिलती है तो लगता है कि सचमुच न्याय है। पिछले दिनों जब ऐसे ही मामले सामने आए तो यौन प्रताडऩा की शिकार हुई युवतियों की हिम्मत को भी दाद देनी पड़ेगी। जो न केवल अदालत की चौखट तक पहुंची बल्कि दुष्कर्मियों को सजा तक दिलाने में कामयाब हुईं।

आसाराम व उनके सहयोगियों को यौनाचार व उसमें सहयोग करने के मामले में हुई सजा पर यौनाचार का शिकार हुई लडक़ी के पिता की पहली प्रतिक्रिया थी कि वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। इस फैसले से आमजनता का भी न्यायपालिका में भरोसा कायम हुआ है। यह फैसला केवल पीडि़ता के पिता को ही नहीं बल्कि उन लाखों बेटियों के मां-बाप को चैन की सांस देने वाला है जो इस तरह की दरिंदगी का शिकार हुई हैं। लेकिन चिंता उस समय होती है जब समाज में अग्रणी कही जाने वाली महिलाएं ही बेटियों का खून फूंकने का काम करती हैं।

एक प्रमुख सिने तारिका कहती हैं कि बलात्कार तो पहले से होता आया है। कोई नेत्री कहती हैं कि महिला को ऐसे रिक्शे में नहीं बैठना चाहिए जहां तीन आदमी पहले ही बैठे हों। तो क्या महिलाओं को पुरुषों से बचना चाहिए? आज एक और स्त्री, पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही है वहीं दूसरी ओर कॉस्टिंग काउच के मामले में यौन शोषण को जायज ठहराने वाली महिलाओं की बुद्धि पर भी तरस आता है। महिला राजनेता भी ये टिप्पणी करती हैं कि आज हर क्षेत्र और क्षेत्र में यौन शोषण हो रहा है। यौन शोषण व बलात्कार के मामले इस वक्त चरम पर हैं।

यह सच्चाई है कि महिलाओं की इज्जत पुरुषों की नजरों में केवल मन बहलाव का जरिया रहा है। इसी के जरिए बहुत सी महिलाओं ने पुरुषों को अपने हाथ का खिलौना बनाया भी है। किन्तु इसका मतलब तो नहीं कि सभी महिलाओं की इज्जत को पुरुष हंसी -खेल समझ अपना मन बहलाते रहें और महिला इन्हीं पुरुषों के आगे बार -बार अग्नि परीक्षा दे अपने को पवित्र साबित करती रहे। कभी न कभी तो रावण को उसके किये का दंड जनता के सामने मिलना ही चाहिए। ऐसे दुखद माहौल में संत का चोला ओढऩे वाले आसाराम जैसों को कोर्ट द्वारा दोषी करार दिया जाना नारी पवित्रता की जीत है। लोगों की धार्मिक भावनाओं का खेल बनाने वाले आसाराम की सजा, धर्म का ढोंग दिखावा कर लोगों को लूटने वालों लिए एक चेतावनी है।

- शालिनी कौशिक (ब्लॉग से साभार)