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Afghanistan News in Hindi : संयुक्त राष्ट्र ( UN) के अधिकारियों ने अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान शासन( Taliban Government) के तहत अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित अफगान महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई है। जानकारी के अनुसार, न्यूयॉर्क में आयोजित "शांति निर्माण प्रयासों में महिलाओं व युवाओं की अधिक भागीदारी होनी चाहिए" शीर्षक वाली एक बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र ने अफगान महिलाओं के अधिकारों और विशेष रूप से लड़कियों के विश्वविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में जाने पर प्रतिबंध के मुद्दे पर गहन चर्चा की।
संयुक्त राष्ट्र के राजनीतिक और शांति स्थापना मामलों के अवर महासचिव रोज़मेरी डिकार्लो ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को एक हारा हुआ कारण बताया। बैठक में डिकार्लो ने कहा, "आखिरकार, यह एक सरल दृष्टिकोण पर निर्भर करता है - उन बाधाओं पर काबू पाने की जो महिलाओं के पूर्ण योगदान को नकारती हैं।" इसके अलावा, लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र इकाई (यूएन-महिला) की कार्यकारी निदेशक सिमा बाहौस ने आंकड़े बताते हुए कहा, "अफगानिस्तान में 2021 के प्रतिबंध के बाद से 1.1 मिलियन लड़कियां स्कूली शिक्षा से वंचित हैं।" ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन तालिबान ने छठी कक्षा से ऊपर की लड़कियों के लिए स्कूल फिर से खोलने के संबंध में अभी तक कोई नया बयान नहीं दिया है। जैसे-जैसे तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण मजबूत किया है, देश में मानवीय संकट गहराता जा रहा है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने वर्तमान अफगान अधिकारियों के साथ जुड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही अफगानिस्तान में "महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों को सुनिश्चित करने" की आवश्यकता पर भी जोर दिया।बैठक में उन्होंने कहा, "हम अफगानिस्तान के संदर्भ में उसी रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं, जो वास्तविक अधिकारियों के साथ जुड़ रहा है, क्योंकि वे अफगानिस्तान में वास्तविक अधिकारी हैं।
उन्होंने कहा कि हम महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के मुद्दे पर भी उन पर लगातार दबाव डालना जारी रखते हैं,यह उनका अधिकार हैं,जिनसे लगभग सीमा पार दैनिक आधार पर इनकार किया जा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाराजगी के बावजूद तालिबान ने इस पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया है कि देश में लड़कियों के लिए स्कूल कब खोले जाएंगे। तालिबान ने बार-बार दोहराया है कि अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकार इस्लामी कानून के ढांचे के भीतर सुनिश्चित किए जाते हैं।
इस्लामिक अमीरात के प्रवक्ता, जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, "अफगानिस्तान में पुरुषों और महिलाओं के पास अधिकार हैं और इस्लामिक अमीरात इस्लामी कानून की ओर से समर्थित उन अधिकारों को देने के लिए प्रतिबद्ध है। इस्लामिक अमीरात सभी नागरिकों के अधिकारों को संबोधित करने का प्रयास करता है।"
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अफगानिस्तान के प्रतिनिधि ने लैंगिक समानता हासिल करने के देश के प्रयासों पर प्रकाश डाला और महिलाओं और लड़कियों पर लगी सीमाएं हटाने की मांग की। वहीं बुनियादी ढांचे के ढहने और आवश्यक सेवाओं के बाधित होने से, अफगानिस्तान में लाखों लोगों को भुखमरी और बीमारियों का खतरा है क्योंकि देश अभी भी मानवीय संकट में है।
उन्होंने कहा कि मानवीय संगठन सुरक्षा चिंताओं और साजो-सामान संबंधी चुनौतियों के बीच सहायता प्रदान करने के लिए संघर्ष करते हैं। तालिबान के कब्जे के बाद से लड़कियों के स्कूलों पर प्रतिबंध के कारण लड़कियों की एक पीढ़ी शिक्षा से वंचित हो गई है, जिससे गरीबी और असमानता का चक्र कायम है।
Updated on:
30 May 2024 11:15 am
Published on:
30 May 2024 11:10 am
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