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ईरान युद्ध और ओसामा बिन लादेन के खात्मे में क्या है कनेक्शन? दोनों जगह अमेरिका ने किया एक जैसा काम

Osama Bin Laden के खात्मे वाले ऑपरेशन नेपच्यून स्पीयर की पूरी कहानी जानिए। कैसे अमेरिकी कमांडोज पाकिस्तान में घुसे, हेलीकॉप्टर क्रैश हुआ और अपनी ही टॉप-सीक्रेट तकनीक बचाने के लिए उसे आग के हवाले करना पड़ा।

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भारत

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Anurag Animesh

Apr 07, 2026

Osama Bin Laden Operation

AI Image-ChatGpt

Osama Bin Laden Operation: हाल ही में अमेरिका ने ईरान में अपने एक सैनिक को बचाने के लिए ऐसा ऑपरेशन चलाया, जिसे खुद अमेरिकी अधिकारियों ने 'फिल्मी, बताया। मिशन आसान नहीं था। रास्ते में हेलीकॉप्टरों पर हमले हुए, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में तकनीकी दिक्कतें आईं, और आखिर में सेना को अपने ही कुछ संसाधनों को नष्ट करना पड़ा। जिसमें हेलीकॉप्टर भी शामिल था। हेलीकॉप्टर में खराबी के कारण अमेरिकी सेना ने उस हेलीकॉप्टर को खुद बम से उड़ा दिया ताकि ईरान के हाथ ये ना लग सके। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है कि अमेरिका ने अपने हेलीकॉप्टर को खुद बम से उड़ा दिया हो। ऐसा पहली भी हो चूका है। आइये जानते हैं।

Operation Neptune Spear: वो रात जिसने इतिहास बदल दिया

मई 2011 की एक अंधेरी रात। पाकिस्तान के एबटाबाद में सब कुछ सामान्य था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही मिनटों में दुनिया का सबसे चर्चित आतंकी ओसामा-बिन-लादेन मारा जाएगा। अफगानिस्तान के जलालाबाद एयरबेस से अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस के कमांडो दो खास स्टील्थ ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों में सवार होकर निकले। ये साधारण हेलीकॉप्टर नहीं थे। इनकी डिजाइन ऐसी थी कि रडार भी इन्हें आसानी से पकड़ न सके और आवाज भी बेहद कम हो। उधर, वॉशिंगटन डीसी में बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी टीम हर पल की अपडेट देख रही थी। मिशन बेहद गोपनीय था और जरा सी गलती पूरे ऑपरेशन को फेल कर सकती थी।

जब प्लान गड़बड़ा गया


सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जैसे ही पहला हेलीकॉप्टर ओसामा के कंपाउंड के ऊपर पहुंचा, अचानक हालात बिगड़ गए। ऊंची दीवारों और बंद जगह के कारण हवा का दबाव बदल गया। हेलीकॉप्टर ने संतुलन खो दिया। पायलट ने बड़ी समझदारी दिखाते हुए पूरी तरह क्रैश होने से बचा लिया, लेकिन हेलीकॉप्टर को मजबूरन कंपाउंड के अंदर ही उतारना पड़ा। उसका पिछला हिस्सा दीवार से टकरा गया और टेल रोटर टूट गया। एक पल के लिए ऐसा लगा कि मिशन फेल हो सकता है। लेकिन अब पीछे हटने का सवाल ही नहीं था।

जेरोनिमो KIA: मिशन पूरा


हेलीकॉप्टर खराब हो चुका था, फिर भी अमेरिकी नेवी सील कमांडो तुरंत एक्शन में आ गए। उन्होंने कंपाउंड को घेरा और अंदर घुस गए। कमरे दर कमरे तलाशी होती गई। आखिरकार तीसरी मंजिल पर ओसामा बिन लादेन मिला। कुछ ही सेकंड में उसे मार गिराया गया। रेडियो पर मैसेज आया, "Geronimo… Enemy KIA", यानी टारगेट खत्म। पूरे ऑपरेशन में करीब 40 मिनट लगे। लेकिन असली चुनौती अभी बाकी थी।

अपने ही हेलीकॉप्टर को बम से उड़ाया


जो हेलीकॉप्टर कंपाउंड में फंसा था, वह अब उड़ने लायक नहीं था। यह कोई आम मशीन नहीं थी, बल्कि अमेरिका की बेहद गोपनीय स्टील्थ तकनीक से लैस था। अगर यह पाकिस्तान के हाथ लग जाता, तो इसकी तकनीक दूसरे देशों तक पहुंच सकती थी। इसलिए फैसला लिया गया कि इसे यहीं खत्म कर दिया जाए। कमांडो ने पहले हेलीकॉप्टर के संवेदनशील उपकरण तोड़े। फिर उसमें विस्फोटक और थर्माइट लगाया गया, जो धातु तक को पिघला देता है। जैसे ही बैकअप हेलीकॉप्टर में टीम और ओसामा का शव लादा गया, पीछे छोड़े गए ब्लैक हॉक को उड़ा दिया गया। एक जोरदार धमाका हुआ। आग की लपटें आसमान तक उठ गईं। कुछ ही सेकंड में वह अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर राख बन चुका था।