
सिंधु जल संधि निलंबन से पाकिस्तान के बांध सूख गए हैं ।(फोटो: एएनआई)
Indus Water Treaty Suspension: कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से सिंधु जल संधि निलंबित (Indus Water Treaty suspension)करने के फैसले का सीधे पाकिस्तान के कृषि क्षेत्र पर असर पड़ा है। झेलम पर स्थित मंगला और सिंधु पर स्थित तरबेला बांधों में जल स्तर 50% से अधिक घट गया (India Pakistan water dispute) है। इससे सिंध और पंजाब प्रांत में खरीफ की बुवाई (Kharif crop failure Pakistan) बुरी तरह प्रभावित हुई है। डॉन के अनुसार देश के दो सबसे बड़े बांधों मंगला और तरबेला में जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया (Mangla Tarbela dam water crisis) है, जिससे सिंचाई और बिजली उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। वहीं 21% जल प्रवाह और 50% जल संग्रहण की कमी के साथ, पाकिस्तान की खेती में अब पानी की भयानक किल्लत सामने आई है।
सिंधु संधि के निलंबन का सीधा असर पंजाब और सिंध प्रांतों में हो रही बुआई पर पड़ा है। आईआरएसए (इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी) के अनुसार, खेतों तक पर्याप्त पानी न पहुंच पाने से फसलें बुआई के पहले चरण में ही मुरझा रही हैं।
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच संधि पर हस्ताक्षर हुए थे।
विश्व बैंक ने इस संधि में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
भारत पूर्वी नदियों का उपयोग करता है, पश्चिमी नदियों पर पाकिस्तान का अधिकार।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि निलंबित की।
उधर भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की हालिया अपील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर कठोर कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर कोई वार्ता नहीं होगी। दुशांबे में ग्लेशियर सम्मेलन के मंच पर भारत ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया।
ताजिकिस्तान में आयोजित संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में शहबाज शरीफ ने कहा – “भारत की ओर से संधि निलंबन एकतरफा और अवैध है, यह हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ है।” शरीफ ने इसे जल राजनीति करार दिया और ग्लोबल समुदाय से हस्तक्षेप करने की मांग की।
भारत ने कहा कि संधि की मूल भावना ‘मैत्री और सद्भाव’ पर आधारित है, लेकिन पाकिस्तान द्वारा लगातार हो रहे आतंकी हमले इस भावना का उल्लंघन करते हैं। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को भारत ने संधि निलंबन का ट्रिगर बताया।
पाकिस्तान के IRSA (Indus River System Authority) के अनुसार:
मंगला और तरबेला बांधों में जल संग्रहण 21% कम।
गर्मी की फसलों के लिए जल उपलब्धता में 50% तक की कमी।
चिनाब नदी में बहाव में अचानक गिरावट।
पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने मंच से कहा- “पाकिस्तान आतंक को पालता है और मंच का दुरुपयोग करता है। जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और जनसंख्या दबाव को देखते हुए सिंधु जल संधि का पुनर्मूल्यांकन समय की मांग है।”
तीन दिवसीय संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में 80 देशों और 70 संगठनों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र रहा — ग्लेशियर पिघलना, जल संकट और पारिस्थितिक संतुलन।
बहरहाल सिंधु जल संधि पर भारत का रुख अब सख्त हो गया है। जल और आतंक के बीच की कड़ी को जोड़कर भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दे दिया है – “आतंकवाद रोको, तभी पानी बहेगा।” यह मुद्दा सिर्फ पानी का नहीं, भरोसे और संप्रभुता का भी है।
Published on:
04 Jun 2025 05:31 pm

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