
पोलैंड राष्ट्रपति चुनाव में कंजर्वेटिव करोल नवरोकी जीते हैं। (फोटो: वाशिंगटन पोस्ट)
Karol Nawrocki Poland Presidential Election 2025: पोलैंड राष्ट्रपति चुनाव 2025 (Poland election 2025 impact) में करोल नवरोकी की जीत ने यूरोपीय राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। उन्होंने 50.89% वोट के साथ उदारवादी उम्मीदवार रफाल ट्रजास्कोवस्की को हराया। नवरोकी की विचारधारा राष्ट्रवादी (Poland nationalist president) और दक्षिणपंथी है, जो यूरोपीय संघ की उदार नीतियों के खिलाफ मुखर है। नवरोकी की राजनीतिक शैली सीधे-सीधे राष्ट्रवाद और पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है। उनकी प्रचार रणनीति में ‘पोलिश पहले’ नीतियों के साथ-साथ पश्चिमी उदारवाद और प्रवासन विरोधी विचारधारा भी प्रमुख रही। उन्होंने वादा किया है कि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की उदारवादी नीतियों को राष्ट्रपति पद के वीटो अधिकार से रोकेंगे और तथ्य यह यूरोपियन यूनिय के साथ पोलैंड के संबंधों में तनाव बढ़ा सकता है। नवरोकी केभारत के साथ रिश्ते महत्वपूर्ण हैं (Nawrocki EU stance India effect) करोल नवरोकी की जीत ( (Karol Nawrocki India relations) ) के भारत के लिए अलग-अलग एंगल से कई मायने हो सकते हैं।
नवरोकी की ‘पोलैंड फर्स्ट’ नीति, भारत के 'वोकल फॉर लोकल' और आत्मनिर्भर भारत जैसे दृष्टिकोण से मेल खा सकती है। दोनों देशों के बीच रक्षा, IT और फार्मा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा मिल सकता है। भारत के लिए यह एक अवसर है कि वह पूर्वी यूरोप में अपने रणनीतिक प्रभाव को बढ़ाए।
नवरोकी की यूरोपीय संघ विरोधी प्रवृत्ति से EU के भीतर मतभेद और गहराएंगे। भारत, EU के साथ चल रही मुक्त व्यापार वार्ताओं में पोलैंड जैसे देशों को संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह यूरोप में भारत के लिए कूटनीतिक लचीलापन और अवसर पैदा कर सकता है।
नवरोकी ने संकेत दिया है कि पोलैंड की प्राथमिकताएं पोलिश नागरिकों पर केंद्रित होंगी, जिससे यूक्रेनी शरणार्थियों को लेकर उनकी नीतियाँ कठोर हो सकती हैं। भारत, जो विश्व मंच पर मानवतावादी मूल्यों का समर्थन करता है, इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को संतुलित रखना चाहेगा।
नवरोकी की ट्रंप समर्थक छवि और अमेरिका के MAGA आंदोलन से मेल-जोल, भारत के लिए अवसर और जोखिम दोनों पेश करता है। अमेरिका में ट्रंप की वापसी के कारण यह त्रिकोणीय संबंध भारत को एक नई कूटनीतिक स्थिति में ला सकता है,जहां भारत को अपने रणनीतिक संतुलन को और अधिक सावधानी से साधना होगा।
भारत के विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि नवरोकी की जीत यूरोप में एक बार फिर दक्षिणपंथी ताकतों की वापसी का संकेत है, जिसका असर भारत की ‘मल्टी-अलायंस डिप्लोमेसी’ पर पड़ सकता है।
ब्रसेल्स और बर्लिन से शुरुआती प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रही हैं। यूरोपीय संघ के अधिकारी नवरोकी की संस्थागत बाधाओं को लेकर चिंतित हैं, वहीं अमेरिका के ट्रंपपंथी हलकों में इस जीत को "वैश्विक राष्ट्रवाद की वापसी" बताया गया है।
भारत सरकार की तरफ से औपचारिक रूप से बधाई दी गई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत "पोलैंड के साथ अपने रणनीतिक हितों को प्राथमिकता देगा, चाहे सत्ता में कोई भी हो।"
रक्षा सौदों पर प्रगति: पोलैंड यूरोप में रक्षा उत्पादन का उभरता केंद्र है। भारत, मेक इन इंडिया के तहत, रक्षा तकनीक के ट्रांसफर में पोलैंड से सहयोग बढ़ा सकता है।
शिक्षा और IT क्षेत्र में साझेदारी: पोलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या बढ़ रही है। नवरोकी की नीतियों से इनके लिए वीजा और रेजिडेंसी पर असर पड़ सकता है।
यूक्रेनी संकट में पोलैंड की भूमिका: पोलैंड यूक्रेन का पड़ोसी है। भारत इस संकट में तटस्थ रहा है, लेकिन पोलैंड की कड़ी प्रवासन नीति भारतीय नागरिकों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती है।
नवरोकी की छवि ट्रंप के "अमेरिका फर्स्ट" अभियान जैसी ही है। उन्होंने MAGA (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) विचारधारा से प्रेरित होकर पोलैंड की पहचान और संस्कृति की रक्षा को प्राथमिक मुद्दा बनाया। यह संकेत देता है कि ट्रंप की सत्ता में वापसी की तरह पोलैंड, अमेरिका और भारत के बीच एक नया राष्ट्रवादी त्रिकोणीय समीकरण बन सकता है। इससे वैश्विक व्यापार, जलवायु समझौते और मानवाधिकार जैसे मुद्दों पर एक नया अंतरराष्ट्रीय ध्रुवीकरण भी जन्म ले सकता है।
बहरहाल करोल नवरोकी की जीत पोलैंड के साथ-साथ यूरोप की राजनीति में भी बड़ा बदलाव लेकर आई है। भारत के लिए यह अवसरों को समझने और एक दूरदर्शी रणनीति तैयार करने का समय है, जो व्यापार, कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े हर पहलू को कवर करे।
Updated on:
02 Jun 2025 04:43 pm
Published on:
02 Jun 2025 04:21 pm
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