रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से यूक्रेन मुद्दे पर बातचीत की। इस यात्रा से रूस की नई रणनीति का संकेत मिला है, जिससे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंता बढ़ सकती है। लावरोव ने रवाना होने से पहले इसका संकेत दिया।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव उत्तर कोरिया में तीन दिन बिताने के बाद वापस लौट गए हैं। इस यात्रा के दौरान उत्तर कोरिया के सबसे बड़े नेता किम जोंग उन से उनकी यूक्रेन को लेकर क्या बातचीत हुई? इसके बारे में उन्होंने रूस के लिए रवाना होने से पहले बड़ा हिंट दे दिया। रूस की नई रणनीति से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन की बढ़ सकती है।
लावरोव रविवार को वॉनसन शहर के कलमा हवाई अड्डे से रवाना हुए। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने शनिवार को वॉनसन में अपनी नौका पर लावरोव से मुलाकात की। बातचीत के दौरान, किम ने यूक्रेन के खिलाफ रूस को बिना किसी शर्त के अपना समर्थन देने को कहा।
अपनी यात्रा के दौरान लावरोव ने शनिवार को अपने उत्तर कोरियाई समकक्ष के साथ रणनीतिक वार्ता भी की। उन्होंने आपसी रक्षा संधि का ईमानदारी से पालन करके दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक रणनीतिक संबंधों में बदलने के प्रयासों का संकल्प लिया।
दूसरी ओर, विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया ने अपने नए पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने और रूसी पर्यटकों को आकर्षित करने के प्रयास से लावरोव को वॉनसन में आमंत्रित किया था।
बता दें कि उत्तर कोरिया ने यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में सहायता के लिए रूस को लगातार तोप के गोले उपलब्ध करा रहा है, जो 152 मिमी के 12 मिलियन से अधिक गोले हैं।
दक्षिण कोरिया की रक्षा खुफिया एजेंसी (डीआईए) के अनुसार, उत्तर कोरिया ने रूस को अब तक हथियारों और तोपों के गोले से भरे लगभग 28,000 कंटेनर उपलब्ध कराए हैं।
डीआईए ने बताया कि अगर 152 मिमी के एकल गोले के साथ गणना की जाए, तो आपूर्ति किए गए गोलों की संख्या 1।2 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है।
पिछले साल अक्टूबर से, उत्तर कोरिया ने युद्ध में सहायता के लिए रूस को खतरनाक हथियार के साथ लगभग 13,000 सैनिक उपलब्ध कराए हैं।
सियोल की खुफिया एजेंसी ने जून के अंत में कहा था कि उत्तर कोरिया जुलाई या अगस्त में रूस में अतिरिक्त सैनिक भेज सकता है। उधर, रूसी मीडिया ने बताया कि उत्तर कोरिया पुनर्निर्माण प्रयासों में सहायता के लिए कुर्स्क में 5,000 सैन्य निर्माण श्रमिक और 1,000 सैपर भेजेगा।