20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

पीएम के जन्मदिन पर देश को मिलेगा यह तोहफा, समुद्र में बढ़ेगी भारत की ताकत

17 सितंबर का दिन देश की सुरक्षा के लिहाज से खास होगा। इस दिन नौसेना की ओर से मारमुगावो नामक मिसाइल विध्वंसक 'प्रोजेक्ट 15 बी' के दूसरे जहाज का जलावतरण किया जाएगा। गौरतलब है कि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है।

2 min read
Google source verification

image

kamlesh sharma

Sep 15, 2016

Mormugao

Mormugao

17 सितंबर का दिन देश की सुरक्षा के लिहाज से खास होगा। इस दिन नौसेना की ओर से मारमुगावो नामक मिसाइल विध्वंसक 'प्रोजेक्ट 15 बी' के दूसरे जहाज का जलावतरण किया जाएगा। गौरतलब है कि इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन है।

इस जहाज का निर्माण करने वाला मझगांव शिपयार्ड कार्यक्रम में निजी जहाज निर्माण यार्ड को शामिल करने के लिए 10 ब्लॉकों का काम आउटसोर्स करेगा। नौसेना का लक्ष्य इस परियोजना में स्वदेशीकरण का स्तर 68 फीसदी तक ले जाने का है। प्रथम स्वदेशी विमान वाहक पोत (आईएससी) के लिए साल 2018 का लक्ष्य रखा है, जबकि सरकार आईएसी 2 पर गंभीरता से विचार कर रही है और यह अपने योजना के स्तर पर है।

अपने बेड़े में 212 जहाज करने का लक्ष्य

वाइस एडमिरल (जंगी जहाज उत्पादन एवं खरीद नियंत्रक) जीएस पाब्बी ने बताया कि नौसेना का लक्ष्य 2027 तक अपने बेड़े में 212 जहाज करने का है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती को हासिल करने के लिए बहुत कड़ी मेहनत करने की जरूरत है। नौसेना ने पिछले एक साल में पांच जहाज शामिल किए हैं, जिनमें तीन जंगी जहाज हैं। जी एस पाब्बी ने बताया कि यह पहला मौका है जब नौसेना ने एक श्रेणी के इतने सारे जहाज बनाए हैं। इस प्रक्रिया ने स्वदेशीकरण में मदद की है। इस परियोजना के तहत प्रथम जहाज और निर्देशित मिसाइल विध्वंसक 'विशाखापत्तनमÓ का 20 अगस्त 2015 को जलावतरण किया गया था।

दुश्मन के मिसाइल को चकमा देने में सक्षम

विशाखापत्तनम अत्याधुनिक हथियारों लैस है। वहीं दूसरी ओर ये दुश्मन के मिसाइल को चकमा देने में भी सक्षम है। वजह यह है कि इसे स्टेल्थ तकनीक से बनाया गया है। इतना ही नहीं ये एटमी, जैविक और रासायनिक हमले के हालात में भी चुनौतियों का सामना कर सकता है। प्रोजेक्ट 15-बी के तहत इसे भी मुंबई के मझगांव डॉकयार्ड में तैयार किया गया था।

खास बात ये भी

इसे तय सीमा के भीतर ही बनाया गया था। ये कोलकाता क्लास के निर्देशित मिसाइल विध्वंसक की अगली श्रृंखला का युद्दपोत है। ये घातक डिस्ट्रॉयर 65 फीसदी स्वदेशी है और इसमें लगे ज्यादातर हथियार देश में ही बने हैं। 7,300 टन वजनी ये नौसेना का सबसे बड़ा डिस्ट्रॉयर यानी कि विध्वंसक है, जिसमें आठ ब्रहोम्स मिसाइल लगे हैं।

इसमें 50 अधिकारी सहित तीन सौ नौसेनिक रहेंगे। इस तरह के चार युद्दपोत बनाए जाएंगे जिन पर करीब 29 हजार करोड़ की लागत आएगी। इसे 2018 तक नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा।