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वाह री सरकार! आमजन की तो छोड़िए, भारत में तो सांसदों तक की नहीं हो रही सुनवाई

जनता ही नही, सांसदों से किए 'वादे' भी अधूरे, लोकसभा में 45 प्रतिशत, राज्यसभा में 55 प्रतिशत आश्वासन सरकार ने नहीं किए पूरे

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क्या आपको लगता है कि सरकार आपको दिए आश्वासनों पर अमल नहीं करती? यदि हां, तो ये खबर आपके दु:ख को थोड़ा कम कर सकती है। दरअसल, संसद के आंकड़े बताते हैं कि सरकार सांसदों को भी दिए आश्वासन पूरे नहीं करती।

16वीं लोकसभा में सरकार ने अपने 45 फीसदी आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। राज्यसभा में आश्वासन पूरे न करने का चलन और ज्यादा है। यहां आंकड़ा 55 फीसदी रहा।

कैसे-कैसे आश्वासन

संसद में प्रश्नकाल या शून्य काल में किसी बिल पर चर्चा करते हुए या प्रस्ताव पर अकसर सरकार सांसदों को आश्वासन दे देती है, जैसे कि 'मामले को देखा जाएगा' या 'सुझाव पर विचार किया जाएगा' आदि।

समिति रखती है ध्यान

आश्वासनों पर अमल के लिए दोनों सदनों में सरकारी आश्वासनों की स्थायी समिति होती है। ये समिति सरकार के आश्वासनों का लेखा-जोखा रखती है। लोकसभा में इस समिति के अध्यक्ष भाजपा सांसद रमेश पोखरियाल निशंक हैं, जबकि राज्यसभा में समिति के अध्यक्ष बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्र हैं।

16वीं लोकसभा में यह है हाल

आश्वासन समिति के अनुसार 16वीं लोकसभा में सरकार ने सांसदों को कुल 3374 आश्वासन दिए, जिनमें से 1724 आश्वासन क्रियान्वित किए। 75 को आंशिक रूप से क्रियान्वित किया गया है। 60 को सरकार ने वापस ले लिया है, जबकि 1515 लंबित हैं। राज्यसभा में 1987 आवश्वासन सांसदों को दिए गए। 854 ही पूरी तरह क्रियान्वित किए गए।

सरकार का हाल

सदन आश्वासन लंबित

राज्यसभा 1987 1100

लोकसभा 3374 1515

13.3% आश्वासन पूरे नहीं किए थे मनमोहन सरकार ने 15वीं लोकसभा में

39.8% आश्वासन पूरे नहीं किए थे यूपीए ने 14वीं लोकसभा में

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