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अन्नदाता की दुर्गति, हर रोज 7 किसान कर रहे आत्महत्या

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण पूरे देश में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। सरकारी सहयोग देने की घोषणा के बाद भी इस तरह की घटनाएं थम नहीं रही है। 

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pawan kumar pandey

Apr 19, 2015

बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण पूरे देश में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। सरकारी सहयोग देने की घोषणा के बाद भी इस तरह की घटनाएं थम नहीं रही है। इस साल जनवरी से लेकर मार्च (3 महीने में) तक 601 किसान महाराष्ट्र में आत्महत्या कर चुके हैं। इस हिसाब से महाराष्ट्र में हर दिन 7 किसान खुदकुशी कर रहे हैं।

मौसम की मार से बेहाल किसान
इस बात की जानकारी महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी आकड़ों से हुई है। आकड़ों के मुताबिक राज्य में साल 2015 में शुरूआती तीन महीने में मौसम की मार झेल रहे 601 किसानों की खुदकुशी कर ली।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक साल 2014 में राज्य में 1981 किसानों ने आत्महत्या की थी। पिछले साल के आकड़ों से तुलना की जाए तो इस बार किसानों के सुसाइड का आंकडा 30 प्रतिशत तक बढ़ गया है।

सीएम के क्षेत्र विदर्भ में सबसे ज्यादा मामले
महाराष्ट्र में यह हालात उस समय है जब राज्य के सीएम किसानों की हर संभव मदद का दावा कर रहे हैं। आत्महत्या करने वाले किसानों में सबसे ज्यादा विदर्भ से है। महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस भी इसी क्षेत्र से आते हैं।

2015 का आंकड़ा (जनवरी-मार्च)
- विदर्भ क्षेत्र- 319
- मराठवाड़ा क्षेत्र- 215

विदर्भ के बाद महाराष्ट्र में मराठवाड़ा किसानों के सुसाइड के मामले में दूसरे स्थान पर आता है।

साल 2014 में जारी आंकड़े (कुल 1981 मौतें)
- विदर्भ- 1097
- मराठवाड़ा- 574

गौरतलब है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से देश के किसानों का बुरा हाल है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में किसानों को संबोधित करते हुए मदद का भरोसा दिया था, लेकिन इसके बाद भी सुसाइड करने का ये सिलसिला थमाने का नाम नहीं ले रहा है।