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इंदिरा गांधी की पूरी कहानी बताने के लिए मुझे कई जन्म लेने होंगे: सोनिया गांधी

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज जयंती है। देशभर में कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर कार्यकर्ता और तमाम नेता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की आज जयंती है। देशभर में कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर कार्यकर्ता और तमाम नेता उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी इस मौके पर इंदिरा को याद करते हुए भावुक हो गईं।

इंदिरा की जयंती पर सोनिया ने उनकी समाधि शक्ति स्थल पर जाकर श्रद्धांजलि दी। सोनिया ने पूर्व प्रधानमंत्री का जिक्र करते हुए कहा, "इंदिरा गांधी की पूरी कहानी बताने के लिए मुझे कई जन्म लेने पड़ेंगे। "

19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। वह देश की चार बार प्रधानमंत्री रहीं। 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद उसी साल इंदिरा के अंगरक्षकों ने 30 अक्तूबर को उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अपनी दादी के साथ पुरानी यादें ताज़ा करते हुए ट्विटर पर एक तस्वीर पोस्ट की है।

राहुल ने ट्वीट किया, "इंदिराजी को याद कर रहा हूं। एक योद्धा, क्रांतिकारी, दृढ़ निश्चयी, संवेदनशील और बलिदान देने वाली महिला। मेरी दादी, मेरी दोस्त और मुझे हमेशा राह दिखाने वाली रोशनी। "

प्रियदर्शिनी से इंदिरा तक

इंदिरा न केवल भारतीय राजनीति पर छाई रहीं, बल्कि दुनिया की राजनीति के क्षितिज पर भी वे एक प्रभाव छोड़ गईं। इंदिरा गांधी का जन्म नेहरू ख़ानदान में हुआ था। उनका पूरा नाम इंदिरा प्रियदर्शनी गांधी है। पिता का नाम जवाहरलाल नेहरू और दादा का नाम मोतीलाल नेहरू।

इंदिरा गांधी, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की इकलौती पुत्री थीं। आज इंदिरा को सिर्फ़ इस कारण नहीं जाना जाता कि वह पंडित जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं, बल्कि इंदिरा गांधी अपनी प्रतिभा और राजनीतिक दृढ़ता के लिए 'विश्व राजनीति' के इतिहास में जानी जाती हैं। इंदिरा को 'लौह-महिला' के नाम से संबोधित किया जाता है।

चार बार प्रधानमंत्री

इंदिरा गांधी लगातार तीन बार (1966-1977) और फिर चौथी बार (1980-84) भारत की प्रधानमंत्री बनीं।

देश के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी भारत की तीसरी और प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनीं।

1967 के चुनाव में वह बहुत ही कम बहुमत से जीत सकीं।

1971 में दोबारा वे भारी बहुमत से प्रधामंत्री बनीं और 1977 तक रहीं।

1977 के बाद 1980 में फिर प्रधानमंत्री बनीं और 1984 तक पद पर रहीं।

आपातकाल में 1 लाख जेल में कैद

15 जून, 1975 को जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में विपक्ष ने आंदोलन को उग्र रूप दे दिया। साथ ही यह तय किया गया कि पूरे देश में सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया जाए और प्रधानमंत्री आवास को भी घेर लिया जाए।

इन्हीं परिस्थितियों के बीच इंदिरा ने 25 जून, 1975 को तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद से आपातकाल लागू करने की हस्ताक्षरित स्वीकृति प्राप्त कर ली।

26 जून, 1975 की सुबह देश में आपातकाल की घोषणा कर दी गई। आपातकाल लागू होने के बाद जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई और अन्य सैकड़ों छोटे-बड़े नेताओं को गिरफ़्तार करके जेल में डाल दिया गया।

ऐसा माना जाता है कि आपातकाल के दौरान एक लाख व्यक्तियों को देश की जेलों में बंद किया गया था। इनमें केवल सियासी ही नहीं, आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी थे जो ऐसे आंदोलनों के समय लूटपाट करते हैं। साथ ही भ्रष्ट कालाबाज़ारियों और हिस्ट्रीशीटर अपराधियों को भी बंद कर दिया गया।

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