
नईदिल्ली। ब्रेड को बड़े चाव से खाने वाले सावधान हो जाएं, क्योंकि ब्रेड के साथ वो जानलेवा रसायन खा रहे हैं। सेंटर फॉर साइंस एंडएनवायरमेंट (सीएसई) की रिसर्च में यह खुलासा हुआ है।
दरअसल सीएसई ने राष्ट्रीय राजधानी में बेचे जाने वाली कुछ बड़ी कंपनियों के ब्रेड की जांच की तो चौंकने वाले परिणाम सामने आए। सीएसई ने पाया कि ब्रेड में पोटैशियम ब्रोमेट और पोटैशियम आयोडेट जैसे खतरनाक रासायन मिले,जो कैंसर का कारण बनते हैं।
सीएसई में जांच करने वाली पॉल्यूशन मॉनिटरिंग लैब की मानें तो भारतीय ब्रेड कंपनियां आटे में पोटैशियम ब्रोमेट औरपोटैशियम आयोडेट का इस्तेमाल कर रही हैं। उधर सीएसई के डिप्टी डायरेक्टरजनरल और लैब के हेड चंद्र भूषण ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमें 84 फीसदी सैंपल पॉजिटिव मिले हैं।
हमनेकुछ सैंपल को अन्य लैब में जांच के लिए भेजा है। हमारी जांच में यह पाया गया है कि ब्रेड में पोटैशियम ब्रोमेटऔर पोटैशियम आयोडेट के अवशेष मौजूद रहते हैं।
कैंसरके लिए जिम्मेदार है पोटैशियम ब्रोमेट
ऑलइंडिया ब्रैड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन का कहना है कि ब्रेड में मिलाए जाने वाले केमिकल को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी रेग्युलेशन की मंजूरी है।
उधर फूड सेफ्टी एंडस्टैंडर्ड्स अथॉरिटी का कहनाहै कि पोटैशियम ब्रोमेट औरपोटैशियम आयोडेट अधिकतम 50 पीपीएमऔर मैदा या बेकरी प्रोडक्ट्स में अधिकतम 20 पीपीएमतक हो सकता है। US जैसेदेशों में यह मात्रा सुरक्षित मानी जाती है।
कैंसर पर रिसर्च करने वाली एंजेसी आईएआरसी ने 1999 में पोटैशियम ब्रोमेट को कैंसर के लिए जिम्मेदार बताया था। 1990 में यूरोपियन यूनियन ने इसका इस्तेमाल करना बंद कर दिया था।
इसके बाद ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन, श्रीलंका जैसे कई देशों ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।
आपको बता दें कि सीएसईकी ओर से ब्रेड को लेकर किए गए खुलासे के बाद केंद्र सरकार इस मामले को लेकर गंभीर दिखाई दे रही है। दरअसल पोटौशियम ब्रोमेट को ब्रेड का स्वाद बढ़ाने, ज्यादा सफेद दिखने और मुलायम बनाने के लिए डाला जाता है।
लजीज रहा है इतिहास
ब्रेड का इतिहास बहुत लजीज रहा है। इसकी सर्वप्रथम शुरुआत कहां हुई, इस संबंध में विद्वानों के अलग-अलग मत हैं लेकिन इस पर सभी एकमत हैं कि ब्रेड का अस्तित्व सदियों से है।
आज विश्व के सभी देशों में ब्रेड का प्रचलन है लेकिन सदियों पहले की तस्वीर इससे अलग थी। माना जाता है कि ईसा से 3,000 वर्ष पूर्व मिस्र में ब्रेड की शुरुआत हुई थी।
वहां लोग आटे में खमीर की टिकिया को भट्टी में पकाते थे। सबकी पसंद बनने से पहले ब्रेड ने लंबा सफर तय किया और इसके स्वरूप व विधि में कई परिवर्तन आए। कई मकबरों में भी ऐसे प्रमाण मिले हैं जिनके आधार पर यह कहा जाता है कि ब्रेड बहुत प्राचीन काल से प्रचलन में है।
देश व जलवायु के आधार पर इसकी सामग्री में कई विभिन्नताएं अवश्य रहीं लेकिन इससे ब्रेड की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

Published on:
24 May 2016 12:27 pm
