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हजारों तरह के फूड सप्लीमेंट्स पर किसी को भी नहीं पता क्या हैं इनके फायदे, अब कसा शिकंजा

फूड सप्लीमेंट्स पर लंबे समय से बहस चल रही है। 2015 में छपी न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार डाइट्री सप्लीमेंट् से औसतन 23 हजार लोग इमरजेंसी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इसमें हृदय और रक्त वाहिका संबंधी तकलीफ के मरीज अधिक होते हैं

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हजारों तरह के फूड सप्लीमेंट्स पर किसी को भी नहीं पता क्या हैं इनके फायदे, अब कसा शिकंजा

हैल्थ सप्लीमेंट के फायदे और नुकसान को लेकर पूरी दुनिया में बहस चल रही है। अमरीकी खाद्य जांच एजेंसी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने डाइट्री सप्लीमेंट्स के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। अमरीका में डाइट सप्लीमेंट्स उद्योग का सालाना कारोबार करीब 3,539 अरब रुपए का है। हैल्थ सप्लीमेंट के बढ़ते बाजार को देख एफडीए ने जनहित में ये कदम उठाया है। उसे सूचना मिली है कि बाजार में बिकने वाले फूड सप्लीमेंट्स में प्रतिबंधित दवाएं और दूसरे तत्त्व मिले हुए हैं जिससे स्वास्थ्य को नुकसान हो रहा है, जबकि कंपनियां लोगों को सिर्फ इसके फायदों के बारे में बताकर मुनाफा कमा रही हैं।

एफडीए ने पिछले महीने इस कड़ी में ऐसी कंपनियों को दर्जनों बार चेतावनी पत्र जारी कर कहा था कि ऐसा करने वाली कंपनियां बाज आएं। चेतावनी पत्र में स्पष्ट किया था की सप्लीमेंट्स में प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल के बाद उससे अल्जाइमर और दूसरी तरह की गंभीर बीमारियों को ठीक करने का दावा बिलकुल न किया जाए।

एफडीए के कमिश्नर स्कॉट गॉटिलेब ने कहा है कि एजेंसी चाहती है 1994 में बने कानून में बदलाव किया जाए जिससे स्वास्थ्य के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ को रोका जा सके। वे बताते हैं कि जब ये कानून बना की डाइट्री प्रोडक्ट को खाद्य पदार्थों की सूची में डाल दिया जाए तब से बाजार में आने से पहले इनकी जांच नहीं होती है। कानून लागू होने से पहले चार हजार तरह के हैल्थ सप्लीमेंट थे और सालाना कारोबार करीब 28 हजार 320 करोड़ रुपए था जबकि आज के समय में बाजार में 80 हजार से अधिक प्रोडक्ट हैं और सालाना कारोबार करीब 35 हजार अरब रुपए से अधिक हो गया है। एफडीए चाहता है कि अब ऐसे प्रोडक्ट की पहचान कर उसे बाजार में बिकने से रोकना है जिससे लोगों को बीमार होने से बचाया जा सके।

तकनीक जो बता सके इसमें है मिलावट

एफडीए अब ऐसी तकनीक विकसित करने की कोशिश में लगा है जिससे जनता ये आसानी से पता कर सके कि संबंधित सप्लीमेंट में खतरनाक तत्त्व मिले हैं जिससे लोग उसके इस्तेमाल से बच सकें। कोशिश तो ये है कि ऐसे सप्लीमेंट्स बिना डॉक्टरी सलाह के कोई खरीद भी न सके। सेंटर फॉर साइंस इसे अच्छा कदम मान रहा है लेकिन एफडीए के पास इतना संसाधन नहीं है जिससे वे अपने लक्ष्य को हासिल कर सके। ऐसे में उसे सरकारी मदद की भी जरूरत पड़ेगी। प्यू चैरिटेबल ट्रस्ट के फूड सेफ्टी प्रोजेक्ट हेड सांद्रा एस्किन का मानना है कि एफडीए आयुक्त का ऐसा बयान पिछले 25 सालों में पहली बार आया है। ये अच्छा कदम है जिससे लोगों का भला होगा।

अब दो हिस्सों में बंटा चुका है उद्योग

एफडीए के इस कदम और तैयारी से सप्लीमेंट उद्योग भी दो हिस्सों में बंट गया है। कंज्यूमर हैल्थ केयर प्रोडक्ट एसोसिएशन ने एफडीए के पक्ष में बयान दिया है कि इससे डाइट्री प्रोडक्ट के बहाने जहर बेचने वालों की पहचान हो पाएगी। उद्योग से जुड़े स्कॉट बाश का कहना है कि एफडीए आयुक्त का कदम स्वागत योग्य है और ऐसा होना चाहिए था। वहीं दूसरी ओर नेचुरल प्रोडक्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और सीइओ डेनियल फैब्रिकेंट का आरोप है कि एजेंसी एक विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ऐसा कर रही है। वे इससे पहले भी इस तरह के मुद्दे को उठाती रही है।

746 प्रोडक्ट में मिल चुकी है मिलावट

कैलिफोर्निया के डिपार्टमेंïट ऑफ पब्लिक हैल्थ की रिपोर्ट के अनुसार एक जांच में 746 डाइट्री प्रोडक्ट में मिलावट पकड़ी गई जिसमें सबसे अधिक यौन शक्ति बढ़ाने, वजन कम करने, मांसपेशी और शरीर मजबूत बनाने वाले प्रोडक्ट शामिल थे। इनमें स्टेरॉयड की मात्रा अधिक थी। एफडीए की कोशिश है कि डाइट्री प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां उत्पादों पर दावा करें कि इससे बीमारी को ठीक नहीं किया जा सकता है। कंपनियों को लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। कंपनियां ऐसा कोई उत्पाद बनाती हैं तो उन्हें उस उत्पाद को बाजार में लाने से पहले अनुमति लेनी होगी तभी इस तरह की भयानक परिस्थितियों से देश दुनिया को बचाया जा सकेगा।

एफडीए आयुक्त का कहना है कि सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले हैल्थ सप्लीमेंट्स को लेकर जल्द ही सार्वजनिक बैठक की जाएगी जहां सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। साथ में ऐसी नीति बनाई जाएगी जिससे ऐसी वस्तुओं को लेकर बाजार में पारदर्शिता बनी रहे। फूड सेफ्टी से जुड़े अधिकारी चाहते हैं कि एफडीए को ये पता रहना चाहिए की कौन सी कंपनी क्या बना रही है? उसमें किन तत्त्वों का इस्तेमाल हो रहा है। इसका लेबल प्रोडक्ट पर लगा होना चाहिए जिससे किसी तरह की मिलावट पकड़े जाने पर कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।

लॉरी मैकगिन्ले, हैल्थ, रिसर्च एंड मेडिसिन रिपोर्टर, वाशिंगटन पोस्ट, वाशिंगटन पोस्ट से विशेष अनुबंध के तहत