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कुष्ठ निवारण दिवसः हर रोज 100 लोगों पर देवी का प्रकोप

कुष्ठ रोग को आज भी ग्रामीण अंचल में देवी का प्रकोप ही माना जाता है। प्रतिदिन 100 से अधिक नये मरीज आज भी राष्ट्रीय जालमा कुष्ठरोग संस्थान में आ रहे हैं।

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Hariom Dwivedi

Jan 30, 2016


आगरा.
कोढ़ यानी कुष्ठ रोग को आज भी ग्रामीण अंचल में देवी का प्रकोप ही माना जाता है। सदियों बाद भी यह देवी का प्रकोप कम नहीं हुआ है। हालत यह है कि अभी भी मरीजों की लंबी कतार रहती है। प्रतिदिन 100 से अधिक नये मरीज आज भी ताजमहल के निकट स्थित राष्ट्रीय जालमा कुष्ठरोग संस्थान में आ रहे हैं। 30 जनवरी को राष्ट्रीय कुष्ठ रोग निवारण दिवस है।


कुष्ठ रोग है अभिशाप

ग्रामीण क्षेत्र के लोग अभी भी मानते हैं कि कुष्ठ रोग पूर्व जन्मों का फल या अभिशाप है। ये देवी का प्रकोप है। इसी भ्रांति के कारण रोगी को समाज से अलग कर दिया जाता है। लोग कुष्ठ रोगी के प्रति घ्रणा की भावना रखने लगते हैं। केन्द्रीय जालमा कुष्ठ रोग संस्थान की अधिकारी डॉ. मधु भारद्वाज का कहना है कि यह रोग अन्य संक्रामक रोगों की भांति जीवाणुओं जिसे लैप्रोसी बैसीलस कहा जाता है, से होता है। आधुनिक समय में इसके लिए जो दवाइयां चल रही हैं, उससे यह रोग पूरी तरह सही हो जाता है।


इसलिए बढ़ रही मरीजों की संख्या

कुष्ठ रोगियों की संख्या आज भी बढ़ रही है। डॉ. मधु भारद्वाज का कहना है जालमा में आज भी 100 नए मरीज रोज आ जाते हैं। इसका कारण है कि कुष्ठ रोग को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। इसके लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है, जो इसका जड़ से इलाज कर सके। हां इतना जरूर है कि कुष्ठ रोग का इलाज यदि सही समय पर शुरू करा दिया जाए, तो विकलांगता से पूरी तरह बचा जा सकता है।


घर रहकर भी हो सकता है इलाज

कुष्ठ रोगी से पीड़ित व्यक्ति को पहले परिवार, घर और गांव से दूर कर दिया जाता था, लेकिन आज इसकी जरूरत नहीं है। कुष्ठ रोगी का इलाज अब घर पर रखकर भी किया जा सकता है। असंक्रामक कुष्ठ रोगी छह माह और संक्रामक रोगी 24 माह के लगातार और नियमित इलाज में पूरी तरह ठीक हो जाता है। कुष्ठ रोगी को समाज की दया नहीं, सहयोग एवं स्नेह की जरूरत है।


कुष्ठ रोग की पहचान

जालमा के पूर्व निदेशक डॉ. वेद भारद्वाज का कहना है कि कुष्ठ रोग की पहचान बेहद आसान है। इसकी शुरुआत में शरीर पर कोई सुन्न दाग या चकत्ता पड़ता है। यदि इन दोनों में से कुछ भी हुआ हो, तो तुरंत डाक्टर की सलाह लें, हो सकता है कि यह कुष्ठ रोग की शुरुआत हो।

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