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आगरा। आजकल सबकुछ बाजार की चाल चाल पर निर्भर है। बाजार ही सबुकछ तय कर रहा है। बाजार भाव अधिक है, तो सरकारें गिर जाती हैं। आगरा के बाजार भाव पर नजर डालें तो चौंकाने वाली जानकारी मिलती है। 84 साल पहले आगरा में सोना 36 रुपया तोला था। ईंट साढ़े दस रुपये प्रति हजार थीं। आज सोना 31000 रुपये और ईंट का भाव छह हजार रुपया है। बादाम एक रुपया सेर मिलता था।
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एक अप्रैल, 1934 में आगरा के बाजार भाव पर एक नजर
सोनाः 36 रुपया तोला
गेहूः एक रुपया का 13 सेर
उर्द की दालः एक रुपया का 13 सेर
मूंग की दालः एक रुपया की 18 सेर
घीः एक रुपया का 12 छटांक
चावलः सात रुपये मन
चनाः एक रुपया का 20 सेर
बूराः एक रुपया का चार सेर
खटाईः 10 आना सेर
सुपारीः एक रुपया की दो सेर
बादामः एक रुपया सेर
राज मिस्त्रीः आठ आना प्रतिदिन
बेलदारः पांच-छह आना प्रतिदिन
सीमेन्ट की बोरीः दो रुपया पौने बारह आना
ईंटः साढ़े दस रुपये हजार
चूनाः सवा चार रुपये चक्की
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चीजें सस्ती होने के बाद भी संकट
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि इस तथ्य का उल्लेख कई पुस्तकों में किया गया है। उन्होंने बताया कि तब आगरा का बाजार भाव एक-एक साल तक स्थिर रहता था। आज की तरह रोज भाव नहीं बदलते थे। चीजें इतनी सस्ती होने के बाद भी लोगों के सामने संकट था, क्योंकि श्रम का उचित मूल्य नहीं मिलता था। जब मजदूर को पांच-छह आना मिलेंगे तो वह कहां से सस्ती चीजें खरीद सकता है।
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जेब घड़ी की कीमत
उन्होंने बताया कि अंग्रेजी समय में अमीरों को जेब घड़ी की शौक था। यूं भी कह सकते हैं कि जिसके पास जेब घड़ी होती थी, उसे अमीर मान लिया जाता था। इस कारण जेब घड़ी की मांग अधिक होने के कारण मूल्य अधिक था। वेस्ट एंड वॉच कंपनी की जेब घड़ी दस रुपया पचास पैसा की मिलती थी।
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Published on:
17 May 2018 08:58 am
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