पनामा की ही बात करें तो इसे इसलिए भी टैक्स हैवन कहा जाता है, क्योंकि यहां के टैक्स सिस्टम के तहत आने वाले टैरेट्रियल सिस्टम के मुताबिक, रेसिंडेंट और नॉन रेसिडेंट कंपनियों से तभी टैक्स वसूला जाता है, जब इनकम देश में ही जेनरेट हुई हो। वैसे यहां कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम भी है। इसी का फायदा भारत या अन्य मुल्कों के अमीर उठाते हैं और अपने मुल्क में कमाई गई रकम को टैक्स से बचाने के लिए पनामा में इन्वेस्ट करते हैं। फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर पनामा में कोई टैक्स नहीं लगता।