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Panama Papers: अमिताभ, ऐश्वर्या के बाद अब उछला नीरा राडिया का नाम

अपने हाईप्रोफाइल संबंधों के लिए जानी जाने वालीं कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया एक बार फिर खबरों में हैं।

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Kaushlendra Singh

Apr 06, 2016

Niira Radia

Niira Radia

लखनऊ। भारत समेत कई मुल्कों में उथल-पुथल मचाने वाले पनामा पेपर्स के नाम से लीक्स हुए दस्तावेजों ने अलग-अलग ढंग से अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। इन पेपर्स में दुनियाभर की राजनीतिक और फ़िल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों, राष्ट्राध्यक्षों और अपराधियों के वित्तीय लेन-देन को शक के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

पनामा पेपर्स के नाम से लीक हुए दस्तावेजों ने जिन नामों के खुलासे किए हैं उनमें कुछ खास नामों का यूपी से भी रिश्ता रहा है। खुलासे वाले दिन ही जिन दो नामों ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं वे थीं सदी के महानायक अमिताभ बच्चन और उनकी पुत्रवधू ऐश्वर्या राय, इसके बाद अब अगली चर्चा हो रही है कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया की।

करीब आठ साल पहले भारतीय सियासत और उद्योग जगत में हलचल मचाने वाली नीरा राडिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। ताजा मामला पनामा पेपर्स लीक्स से जुड़ा हुआ है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक नीरा राडिया की ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में एक कंपनी का कामकाज पनामा की लॉ फर्म मोसेका फोंसेका देखती थी।

अखबार के मुताबिक लीक हुए दस्तावेजों में उनका नाम NIRA लिखा है जो कि उनके मुल नाम NIIRA में एक आई के कम होने की वजह से है। बताया जा रहा है कि नीरा राडिया की स्वामित्व वाली कंपनी कथित तौर पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में है।

राडिया ने नकारा

नीरा राडिया की कंपनी वैष्णवी कम्यूनिकेशंस ने इन आरोपों का खंडन किया है। राडिया के मुताबिक साल 1994 में उनके पिता इकबाल नरायन मेनन ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में क्राउन मार्ट इंटरनेशनल कंपनी खोली थी। लेकिन वे किसी भी तरह से उसमें हिस्सेदार नहीं रही हैं। उन्होंने कहा कि क्राउन मार्ट इंटरनेशनल कंपनी का कामकाज पनामा की लॉ फर्म मोसेक फोंसेका किया करती थी। राडिया ने कहा कि बाहर के मुल्कों में उनकी जो भी संपत्तियां है उनके बारे में भारत और लंदन में जानकारी पहले ही दी थी।

क्या है पनामा पेपर्स लीक्स

पनामा की लॉ फर्म मोसैक फॉन्सेका के जरिए तकरीबन 1.15 करोड़ से अधिक दस्तावेज गुमनाम सोर्स से जर्मनी के अखबार सुडुशे जीतुंग को मिले। इस अखबार ने इन दस्तावेजों को अंतरराष्ट्रीय खोजी पत्रकार संघ (आईसीआईजे) के साथ साझा किया। इसके बाद 100 से अधिक मीडिया समूहों के 300 पत्रकारों ने अपनी जांच की और इसे अब तक के इतिहास में सबसे बड़ी जांच करार दिया।

आईसीआईजे की तरफ से कहा गया कि 2 लाख 14 हजार ऑफशोर कंपनियों की जांच से 1 करोड़ 15 लाख दस्तावेजों को हासिल किया गया। भविष्य में पनामा पेपर्स लीक का क्या होगा ये तो अभी नहीं कहा जा सकता, लेकिन दुनियाभर में इसका जबरदस्त राजनीतिक असर देखने को फिलहाल देखने को मिल रहा है।

क्या है टैक्स हैवन कंट्री

टैक्स हैवन उन देशों को कहा जाता है जो राजनीतिक और आर्थिक रूप से स्थिर माहौल में विदेशी व्यक्तियों, निवेशकों या कारोबारियों को न के बराबर की टैक्स लायबिलिटी प्रदान करता है। इन मुल्कों में कमाई पर किसी तरह का कोई टैक्स नहीं लगता है। टैक्स संबंधी इन्ही लाभों को उठाने के लिए अमीर लोग इन मुल्कों में इन्वेस्ट करते हैं। इतना ही नहीं इन मुल्कों में कारोबार या इन्वेस्ट के लिए वहां के नागरिक होने या रहने की भी कोई जरूरी शर्त नहीं होती।

पनामा को क्यों कहा जाता है टैक्स हैवन देश?

पनामा की ही बात करें तो इसे इसलिए भी टैक्स हैवन कहा जाता है, क्योंकि यहां के टैक्स सिस्टम के तहत आने वाले टैरेट्रियल सिस्टम के मुताबिक, रेसिंडेंट और नॉन रेसिडेंट कंपनियों से तभी टैक्स वसूला जाता है, जब इनकम देश में ही जेनरेट हुई हो। वैसे यहां कॉर्पोरेशन टैक्स सिस्टम भी है। इसी का फायदा भारत या अन्य मुल्कों के अमीर उठाते हैं और अपने मुल्क में कमाई गई रकम को टैक्स से बचाने के लिए पनामा में इन्वेस्ट करते हैं। फॉरेन इन्वेस्टमेंट पर पनामा में कोई टैक्स नहीं लगता।

अब बात Niira की

विवादों में घिरने के बाद कुछ साल नीरा राडिया ने गुमनामी में बिताए, यदा-कदा ही उनकी खबरें आईं लेकिन साल 2016 के शुरुआती महिनों में उन्होंने यूपी से एक शानदार वापसी की। मथुरा में उन्होंने एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया है। नीरा ने यह ईकाई नयाति हेल्थकेयर एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तहत खोली है। उनका उद्देश्य द्वितीय और तृतीय श्रेणी शहरों में एक मल्टी सुपर-स्पेशियलिटी हेल्थकेयर चेन शुरू करने का है। इस चेन की शुरुआत मथुरा से हुई है।

मथुरा में 351 बिस्तर वाले इस हाईटेक अस्पताल का शुभारंभ करने रतन टाटा खुद पहुंचे थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, "यह एक खुशी की बात है कि काफी व्यक्तिगत बलिदान, जुनून और एक वास्तविक समुदाय की सेवा करने की इच्छा से प्रेरित एक संपूर्ण स्पेशियलिटी अस्पताल की मथुरा में स्थापित किया जा रहा।"

मीडिया की सुर्खियों में रहीं हैं नीरा राडिया

नीरा राडिया एक जमाने में कंपनियों के लिए लॉबिंग किया करती थीं। कुछ साल पहले प्रमुख राजनेताओं, उद्योगपतियों तथा मीडियाकर्मियों से कथित बातचीत का टैप लीक होने के बाद वह विवादों में घिर गई थी। जिसके बाद उन्होंने अपनी जनसंपर्क कंपनी वैष्णवी कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंज तथा उसकी अन्य इकाइयों को बंद कर दिया था। नीरा राडिया के करीब 800 ऑडियो टेप इन दिनों सुर्खियों में थे। इस प्रकरण के चलते तत्कालीन सरकार भी कटघरे में आ गई थी और उसे सुप्रीमकोर्ट में अपना पक्ष रखना पड़ा था।

नीरा राडिया की कहानी

इंटरनेट पर मिली जानकारी के मुताबिक नीरा राडिया का असली नाम है नीरा शर्मा। उनके पिता जी एक जमाने में केन्या में काम करते थे और बाद में लंदन बस गये, जहां नीरा शर्मा की पढ़ाई हुई। नीरा की दोस्ती विदेश में ही गुजराती मूल के और फाइनेंस का काम करने वाले जनक राडिया से हुई और इस तरह नीरा शर्मा नीरा राडिया बनीं।

1995 में काम की तलाश में नीरा राडिया भारत आयीं। भारत में सबसे पहली नौकरी नीरा को सहारा समूह में मिली और सहारा एयर लाइन के गठन में नीरा ने काफी काम किया। फिर नीरा राडिया सिंगापुर एयर लाइन, केएलएम और यूकेएएल की भारत प्रतिनधि बन गयी। पांच साल में इतने पैसे आ गये थे कि सन 2000 में बहन करुणा मैनन के साथ मिल कर क्राउन एयर के नाम से विमान सेवा शुरू की। सौ करोड़ रुपये के विदेशी निवेश की अनुमति भी ले ली लेकिन बात कहीं जा कर अटक गयी। अगले साल दलाली और जनसंपर्क की कंपनी वैष्णवी कम्युनिकेशंस शुरू की और आखिरकार चार और कंपनियां बना डालीं।

1990 में टाटा समूह की सारी 90 कंपनियों का विज्ञापन और जनसंपर्क अकाउंट वैष्णवी और सहयोगी कंपनियों पर आ गया। 2005 में मैजिक एयर के नाम से ललित मोदी की मोदीलुफ्त एयर लाइन खरीदने का सौदा हो चुका था मगर नीरा के पास ब्रिटिश पासपोर्ट था और भारत में विमान सेवा के निवेश के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी था।

आपको यह जानकर भी हैरानी हो सकती है कि बंगाल में जब टाटा नैनो फैक्टरी को लेकर बवाल मचा था तो उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुगाड़ कर के यह फैक्टरी नीरा ही गुजरात ले गयी थीं।

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