8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘ताजमहल शाहजहां ने नहीं बनवाया,’ निर्माण का कोई साक्ष्य नहीं; दिल्ली हाईकोर्ट में PIL दायर

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ASI को ताज महल (Taj Mahal) के निर्माण से संबंधित इतिहास की किताबों में बदलाव की मांग करने वाले प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

2 min read
Google source verification

आगरा

image

Suvesh shukla

Nov 03, 2023

Taj Mahal was not built by ShahjahanPIL filed in Delhi High Court

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को ASI को ताज महल (Taj Mahal) के निर्माण से संबंधित इतिहास की किताबों में बदलाव की मांग करने वाले प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। किताब में दावा किया गया कि राजा मान सिंह के महल को तोड़ने और उस स्थान पर ताजमहल के निर्माण का कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है। जस्टिस सतीश चंदर शर्मा और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने एक पीआईएल का निपटारा करते हुए एएसआई को ताजमहल के निर्माण के संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया, जिसमें इतिहास की किताबों में बदलाव की मांग की गई थी।


गलत ऐतिहासिक तथ्य पढ़ाए जाने का दावा
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आगरा में ताज महल स्थल पर 31/12/1631 तक राजा मान सिंह के महल के अस्तित्व के साथ ताज महल की उम्र के बारे में जांच कर के हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट दाखिल करने और निर्देश देने की मांग की गई है। दायर याचिका में दावा किया गया है कि जनता और बड़े पैमाने पर लोगों को ताजमहल के निर्माण से संबंधित गलत ऐतिहासिक तथ्य पढ़ाए और बताए जा रहे हैं।

एएसआई के किनारा करने के बाद दायर की याचिका
याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने दावा किया है कि कार्रवाई का कारण तब उत्पन्न हुआ जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने यह कहकर इन प्रश्नों पर कोई रुख अपनाने से खुद को मुक्त कर लिया कि ये प्रश्न गहन अध्ययन और शोध का विषय हैं। याचिकाकर्ता ने कहा कि कार्रवाई का कारण आज भी कायम है क्योंकि ताज महल के निर्माण से संबंधित गलत ऐतिहासिक तथ्य अब भी पब्लिक डोमेन में मौजूद हैं।

वेबसाइट पर गलत जानकारी देने का दावा
याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया है कि एएसआई ने अपनी आगरा सर्कल वेबसाइट में ताज महल पर परस्पर विरोधी और विरोधाभासी जानकारी दी है। इसके तहत, एएसआई ने बताया है कि 1631 में मुमताज महल की मृत्यु के छह महीने बाद उनके शरीर को ताजमहल के मुख्य मकबरे के तहखाने में स्थापित करने के लिए आगरा भेज दिया गया था। वहीं दूसरी ओर ताजमहल को लेकर उसी वेब पेज में दी गई जानकारी के विरोधाभासी है, जहां एएसआई ने दावा किया है कि 1648 में स्मारक परिसर को पूरा होने में 17 साल लग गए थे।

वास्तुकार के जिक्र ना होने का दावा
वहीं इस वेबसाइट पर उस्ताद अहमद लाहौरी को ताजमहल का वास्तुकार बताया गया है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने जो अध्ययन किया है उससे यह पता चलता है कि ताज महल के वास्तुकार के रूप में उस्ताद अहमद लाहौरी की पहचान का समर्थन करने वाले साक्ष्य केवल परिस्थितिजन्य हैं। शाहजहां के विभिन्न दरबारी इतिहासकार ताज महल के वास्तुकार के नाम के बारे में कुछ नहीं बोले हैं। याचिकाकर्ता ने कहा है कि यह बेहद अजीब बात है कि शाहजहां के सभी दरबारी इतिहासकारों ने इस भव्य मकबरे के वास्तुकार का नाम नहीं बताया है। इसलिए, यह साफ तौर पर इशारा करता है कि राजा मान सिंह की हवेली को ध्वस्त नहीं किया गया था। बल्कि ताज महल के वर्तमान स्वरूप को बनाने के लिए केवल संशोधित और पुनर्निर्मित किया गया था। याचिका में यह भी कहा गया है कि शाहजहां के दरबारी और इतिहासकारों ने इसके निर्माणकर्ता के बारे में कुछ भी नहीं कहा है।