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Ramadan Special अल्लाह की आयतों को झुठलाने वालों का अंजाम बुरा

सूरा अल फुरआन में अल्लाह की आयतों को झुठलाने वालों और रसूल की बात न मानने वालों का अंजाम बहुत खराब बताया गया है।

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Amit Sharma

Jun 18, 2016

Quran

Ramadan

आगरा।
13वीं तरावीह में 19वां पारा पढ़ा गया। सूरा अल फुरआन में अल्लाह की आयतों को झुठलाने वालों और रसूल की बात न मानने वालों का अंजाम बहुत खराब बताया गया। जिन लोगों ने ऐसा किया, कल कयामत के दिल वे पछता रहे होंगे। यह भी बताया गया कि हिदायत और मदद देने वाला तो मात्र एक अल्लाह ही है।


अल्लाह का करें सजदा

आगे लगातार आयतों में अल्लाह ने अपनी सत्ता का बखान किया है। कहा गया है कि ए मुहम्मद आप केवल हमेशा रहने वाले अल्लाह पर भरोसा करें। जिसे कभी मौत नहीं आएगी। वही हैं, जिसने आसमान, जमीन और उनके बीच में सबकुछ पैदा किया है। वह तो बेहद रहम करने वाला है, तो उसे सजदा करो।


अच्छे लोगों की यह होती है पहचान

अच्छे लोगों की पहचान बताते हुए आयत 63 में कहा गया है कि सच्चे बंदे वे हैं, जो जमीन पर नरमी से चलते हैं। अकड़ कर सीना तान कर नहीं चलते और जब जाहिल लोग उनसे ​झगड़े की बात करते हैं, तो वे उन्हें सलाम करके आगे बढ़ जाते हैं। यही लोग रात के अधेरे में अपने रब से डर कर इबादत करते हैं। जब कुछ खर्च करते हैं, तो न फिजूल खर्ची करते न बेहद कंजूसी, बल्कि बीच का रास्ता अपनाते हैं।


अल्लाह की आयतों से ये मिलती तामील

इन आयतों के जरिए अल्लाह इंसान को यह तालीम दे रहा है, कि समाज सुधार के लिए अभियान चलाने या नारेबाजी की जरूरत नहीं है। व्यक्ति को स्वंय अपने अंदर यह खूबियां पैदा करने की जरूरत है। जब एक इंसान अंदर घमंड से दूर रहने, अकड कर न चलने, जाहिलों से झगडा न करने जैसी खूबियां पैदा हो जाएंगी, तो समाज जन्नत का नमूना बन
जाएगा।

प्रस्तुति- डॉ. सैयद इफ्तिखार जाफरी (हाफिज)

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