अच्छे लोगों की पहचान बताते हुए आयत 63 में कहा गया है कि सच्चे बंदे वे हैं, जो जमीन पर नरमी से चलते हैं। अकड़ कर सीना तान कर नहीं चलते और जब जाहिल लोग उनसे झगड़े की बात करते हैं, तो वे उन्हें सलाम करके आगे बढ़ जाते हैं। यही लोग रात के अधेरे में अपने रब से डर कर इबादत करते हैं। जब कुछ खर्च करते हैं, तो न फिजूल खर्ची करते न बेहद कंजूसी, बल्कि बीच का रास्ता अपनाते हैं।