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एक वर्ष में 13 हजार की स्क्रीनिंग, पहचाने 3023 प्री-ओरल कैंसर के मामले

अहमदाबाद शहर के मेडिसिटी कैंपस स्थित गुजरात डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीडीसीएच) ने ओरल कैंसर की रोकथाम और मुंह के स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। सरकार की प्रिवेंटिव हेल्थकेयर नीति के चलते यह संस्थान आज न केवल गुजरात बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा […]

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World Oral Health Day

एआइ फोटो

अहमदाबाद शहर के मेडिसिटी कैंपस स्थित गुजरात डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीडीसीएच) ने ओरल कैंसर की रोकथाम और मुंह के स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। सरकार की प्रिवेंटिव हेल्थकेयर नीति के चलते यह संस्थान आज न केवल गुजरात बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।वर्ष 2025 में जीडीसीएच की विशेष पहल के तहत 12915 स्क्रीनिंग की गईं, जिनमें से 3023 प्री-कैंसर केसों की पहचान हुई। यह आंकड़ा वर्ष 2024 के 2617 मामलों की तुलना में ज्यादा है। शुरुआती चरण में रोग की पहचान से हजारों परिवार कैंसर के भय से मुक्त हुए हैं और राज्य की कैंसर संस्थाओं पर पड़ने वाला बोझ भी कम हुआ है।

राज्यव्यापी जागरूकता अभियान के तहत वर्ल्ड ओरल हेल्थ मंथ के दौरान 33 जिलों में 282 डेंटिस्ट्स ने मिशन मोड में कार्य किया। इस दौरान 265 हेल्थ टॉक्स, दो वॉकथॉन और 94 स्थानों पर ‘तमाकू निषेध’ की शपथ दिलाई गई। ग्रामीण स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर कैंसर की पहचान को जमीनी स्तर तक संभव बनाया गया।

मुंह के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ी है जागरूकता

नियमित सेवाओं के आंकड़े भी मुंह के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 224130 से अधिक मरीजों ने डेंटल ओपीडी सेवाओं का लाभ लिया। वर्ष 2026 में भी यह सिलसिला जारी है, जिसमें जनवरी और फरवरी माह में क्रमशः 17788 और 17564 मरीजों ने उपचार प्राप्त किया।

कैदियों व गर्भवती महिलाओं की जांच

जीडीसीएच की आउटरीच पहल भी सराहनीय रही। मोबाइल डेंटल टीम और 45 विशेष डेंटल कैंपों के माध्यम से जेल के कैदियों, गर्भवती महिलाओं, वृद्धों और दिव्यांग बच्चों सहित 4980 से अधिक लाभार्थियों की जांच की गई। स्कूलों में आयोजित कैंपों में बच्चों को आधुनिक प्रिवेंटिव उपचार जैसे पिट एंड फिशर सीलेंट और फ्लोराइड वार्निस प्रदान किए गए, जिससे दांतों की बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।