आईसीयू रूम में एक तरफ प्रार्थना तो दूसरी तरफ पढ़ा जा रहा था कलमा अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 93वां अंगदाता बना ब्रेनडेड मरीज
अहमदाबाद. अहमदाबाद शहर के सिविल अस्पताल में रविवार सुबह उस वक्त सांप्रदायिक सद्भावना का दृश्य देखा गया जब आईसीयू में एक ओर हाथ जोडकऱ लोग प्रार्थना कर रहे थे वहीं दूसरी ओर परवरदिगार को कलमा पढ़ा जा रहा था। दरअसल आईसीयू में उपराधीन एक मुस्लिम युवक को ब्रेनडेड घोषित करने के बाद परिजनों ने अंगदान का निर्णय किया था। जिसके कारण तीन लोगों को नई जिन्दगी मिल गई। इसके साथ ही अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में ब्रेनडेड अंगदाताओं की संख्या 93 हो गई है।
अहमदाबाद शहर के वटवा क्षेत्र निवासी 35 वर्षीय रूबेन शेख के सिर में पिछले दिनों गंभीर चोट लगी थी। उसे गत शुक्रवार को अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। दो दिन तक गहन उपचार के बावजूद रूबेन की हालत में सुधार नहीं हुआ। जरूरी जांच के बाद रविवार को इस युवक को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने परिवार को अंगदान के बारे में जानकारी देते हुए अन्य जरूरतमंद लोगों की जिन्दगी मिलने की बात कही। रूबेन के अंग अन्य किसी व्यक्ति में प्रस्थापित हों और उससे नया जीवन मिले, इस उद्देश्य से परिजनों ने अंगदान की सहमति दे दी। रीट्राइवल रूम में चार से पांच घंटे में दो किडनी और एक लिवर का दान किया गया। इन तीनों ही अंगो को सिविल अस्पताल कैंपस के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिस एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में उपचाराधीन मरीजों को प्रत्यारोपित किया। रूबेन के ब्रेनडेड घोषित किए जाने के बाद परिजनों ने जैसे ही अंगदान की सहमति दी थी, उस दौरान आईसीयू में सांप्रदायिक सद्भावना का माहौल देखा गया। एक तरह अस्पताल में प्रार्थना की जा रही थी और दूसरी ओर कलमा पढ़ा जा रहा था।
अहमदाबाद शहर में पहला मुस्लिम अंगदाता
अहमदाबाद शहर में रूबेन शेख पहला मुस्लिम अंगदाता बना है। इससे पहले कच्छ जिले से एक मुस्लिम परिवार की सहमति से ब्रेनडेड मरीज के अंगदान किए गए थे। राज्य में अंगदान के प्रति बढ़ रही जागरुकता के कारण लोग आगे आ रहे हैं। अब लोग बिना किसी भेदभाव के आगे आ रहे हैं। अहमदाबाद के अकेले सिविल अस्पताल में अब तक 93 ब्रेनडेड दाताओं से कुल 294 अंग मिले हैं। इनसे से 272 लोगों को नया जीवन मिला है।
डॉ. राकेश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल