
वडोदरा. जिले के छाणी गांव के 200 जैन परिवारों में 300 से अधिक दीक्षार्थियों के जरिए पूरे भारत में अपनी अलग पहचान और गौरव स्थापित किया है।
संस्कारों और संसार के बंधनों से मुक्त होकर संयमी जीवन जीने की कठिन कल्याणकारी यात्रा का यह अद्भुत अनुभव सभी के लिए प्रेरणादायी बना है। जैन और हिंदू धर्म में दीक्षा संसार की मोह-माया त्यागकर संयमी जीवन जीने और मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग है।
छाणी निवासी धर्मेश शाह के साधन सम्पन्न परिवार की इंजीनियर पुत्री विश्वा 11 फरवरी को दीक्षा ग्रहण करेंगी। सोमवार को उन्होंने शोभायात्रा में वर्षीदान किया। विश्वा के पिता धर्मेश शाह पॉलिटेक्निक कॉलेज से सेवानिवृत्त हुए। बड़ी पुत्री का विवाह हो चुका है। विश्वा पढ़ाई के साथ धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रही।
विश्वा ने अनेक देशों की यात्रा की है और उसे रिवर राफ्टिंग और ट्रेकिंग जैसी साहसिक गतिविधियों का शौक था। उसने सब कुछ त्यागकर दीक्षा लेने का निर्णय किया। जब माता-पिता ने विवाह की बात की तो उसने कहा कि यह संसार असार है, मुझे शाश्वत सुख के लिए दीक्षा लेनी है।
आज जब उच्च शिक्षित और प्रतिभाशाली युवा करियर बनाने की दौड़ में हैं, तब इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की छात्रा विश्वा ने संसार का मोह त्यागकर दीक्षा लेने का निर्णय सुनाया। माता-पिता और परिजनों ने इसे हर्षपूर्वक स्वीकार किया।
तपागच्छाधिपति आचार्य विजय रामसूरीश्वर (डहेला वाले) की उपस्थिति में विश्वा की दीक्षा का तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। सोमवार को वर्षीदान की शोभायात्रा निकली। मंगलवार को शक्तिस्तव अभिषेक, श्रवणी वंदना और मुमुक्षु आगमन होगा। 11 फरवरी को छाणी के शांतिनाथ भगवान के 131 वर्ष पुराने जिनालय में दीक्षा समारोह होगा।
Published on:
09 Feb 2026 10:30 pm
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