
पाटण. गुजरात सरकार के खेल, युवा एवं सांस्कृतिक गतिविधि विभाग तथा पाटण जिला प्रशासन की ओर से हर वर्ष की परंपरा के अनुसार रानी की वाव उत्सव-2026 का आयोजन रानी की वाव परिसर में किया गया।
विश्व धरोहर स्थल रानी की वाव परिसर में उत्सव के दूसरे और अंतिम दिन रविवार रात को लोकगायक ऋषभ आहीर ने प्रस्तुति दी। उनके मधुर संगीत से रानी की वाव परिसर जगमगा उठा।
इससे पहले, शनिवार रात को प्रभारी मंत्री स्वरूपजी ठाकोर ने उत्सव का उद्घाटन किया। इस अवसर पर बलराज शास्त्री एंड ग्रुप की संगीत संध्या का आयोजन किया गया। साथ ही भरूच का प्रसिद्ध सीदी धमाल लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतियों को दर्शकों ने उत्साहपूर्वक सराहा।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि रानी की वाव को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में स्थान मिलना केवल पाटण ही नहीं, बल्कि पूरे गुजरात और भारत के लिए गर्व की बात है। हमारी समृद्ध संस्कृति को उजागर करने और इस गौरव को याद करने के लिए राज्य सरकार की ओर से हर वर्ष इस उत्सव का आयोजन किया जाता है।
ठाकोर ने कहा कि पाटण एक ऐतिहासिक नगरी है, इसे लगभग 800 वर्षों तक गुर्जर धरती की राजधानी होने का गौरव प्राप्त रहा। सरस्वती नदी के तट पर स्थित रानी की वाव का निर्माण ईस्वी सन 1063 में सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम की स्मृति में रानी उदयमती ने करवाया था। प्रेम, समर्पण और कला की अद्वितीय अभिव्यक्ति के रूप में निर्मित यह वाव भारत की श्रेष्ठ शिल्प-स्थापत्य कृतियों में स्थान रखती है।
सदियों पूर्व समय के प्रवाह में भूमि में दबी इस धरोहर को भारतीय पुरातत्व विभाग ने ईस्वी सन 1968 में उत्खनन के माध्यम से पुनः उसके मूल स्वरूप में उजागर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से वर्ष 2014 में रानी की वाव को यूनेस्को ने वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा दिया। 2018 में 100 रुपए के नए नोट पर रानी की वाव को स्थान मिला, जो इसकी वैश्विक पहचान का प्रमाण है। ठाकोर ने कहा कि रानी की वाव पाटण की शान, गुजरात की पहचान और भारत की सांस्कृतिक विरासत की जीवंत प्रतीक बन चुकी है। देश-विदेश से हजारों पर्यटक यहां आकर हमारे पूर्वजों की कलात्मक दृष्टि को नमन करते हैं।
Published on:
09 Feb 2026 10:27 pm
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