
आणंद. आणंद कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से रविवार को गुजरात के कृषि, किसान कल्याण और सहकारिता विभाग की ओर से प्राकृतिक खेती परिसंवाद का आयोजन किया गया।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि कि प्राकृतिक खेती कोई व्यक्ति विशेष का अभियान नहीं, बल्कि यह पूरे राष्ट्र का मिशन है। प्राकृतिक खेती ईश्वरीय कार्य है, इसे राष्ट्रव्यापी मिशन के रूप में अपनाना चाहिए। इसे परम कर्तव्य मानकर अपनाना, जन-जन तक पहुंचाना और दूसरों को प्रेरित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कृषि विभाग के क्षेत्रीय विस्तार अधिकारियों, ग्रामसेवकों, आत्मा परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों, बागायती अधिकारियों, कृषि सखियों, प्रगतिशील किसानों और समुदाय संसाधन व्यक्तियों के साथ संवाद किया। इस दौरान उन्होंने अहमदाबाद, आणंद, खेड़ा, गांधीनगर और बोटाद जिलों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद स्थापित कर प्राकृतिक खेती को लेकर उनके अनुभव और शंकाएं सुनीं।
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि किसान अक्सर प्राकृतिक खेती से इसलिए घबराते हैं क्योंकि वे इसे जैविक खेती के समान मान लेते हैं। उन्होंने कहा कि जैविक और प्राकृतिक खेती में मौलिक अंतर है। जैविक खेती में कम उत्पादन और अधिक लागत होती है, जबकि प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं पर आधारित प्रणाली है जिसमें न्यूनतम लागत में अधिक और स्वास्थ्यवर्धक उत्पादन संभव है।
उन्होंने हरित क्रांति के जनक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय एक हेक्टेयर भूमि में मात्र 13 किलोग्राम नाइट्रोजन की सिफारिश की जाती थी, जबकि आज एक एकड़ में 13 थैले नाइट्रोजन डाला जा रहा है। इससे मिट्टी की जैविक गुणवत्ता नष्ट हो रही है। इसका एकमात्र समाधान प्राकृतिक खेती ही है, जिससे मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ती है और उपजाऊपन पुनर्स्थापित होता है।
आणंद कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के.बी. कथीरिया ने बताया कि विश्वविद्यालय शोध आधारित ऐसी औषधियों पर कार्य कर रहा है जो कीट नियंत्रण में सहायक हों और फसल को नुकसान न पहुंचे। उन्होंने विश्वविद्यालय की ओर से प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी साझा की।
Published on:
25 May 2025 10:36 pm
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