31 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अहमदाबाद

Video News: अहमदाबाद: सिविल अस्पताल में 140 वां ब्रेन डेड बना अंगदाता, तीन अंगों का किया गुप्त दान

अहमदाबाद के कालूपुर क्षेत्र निवासी 33 वर्षीय एक युवक को पिछले दिनों सिर में गंभीर चोट आने के कारण सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां गहने उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। गत नौ जनवरी को विशेष जांच किए जाने के बाद चिकित्सकों ने मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।इस संबंध में अस्पताल की टीम ने मरीज के परिजनों को अंगदान के लिए समझाया। परिजनों ने बिना नाम घोषित किए अंगदान की स्वीकृति दी।

Google source verification

एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद सिविल अस्पताल में शुक्रवार को 140वें ब्रेन डेड मरीज के तीन अंगों का दान किया गया। अस्पताल में इस वर्ष किए गए पहले अंगदान की खास बात यह है कि इसमें ब्रेनडेड मरीज का नाम गुप्त रखा गया है। यह मरीज मूल रूप से अन्य किसी राज्य का है, जो अहमदाबाद में रह रहा था। इससे पहले अस्पताल में 139 ब्रेन डेड मरीजों के अंगदान किए गए।

अहमदाबाद के कालूपुर क्षेत्र निवासी 33 वर्षीय एक युवक को पिछले दिनों सिर में गंभीर चोट आने के कारण सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां गहने उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। गत नौ जनवरी को विशेष जांच किए जाने के बाद चिकित्सकों ने मरीज को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।इस संबंध में अस्पताल की टीम ने मरीज के परिजनों को अंगदान के लिए समझाया। परिजनों ने बिना नाम घोषित किए अंगदान की स्वीकृति दी। अंगों को गुप्त रूप से दान करने का निर्णय किया था। जिसके बाद ब्रेन डेड मरीज की दो किडनी और लिवर का दान स्वीकार किया। इन अंगों को सिविल कैंपस के ही इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजिज एंड रिसर्च सेंटर (आईकेडीआरसी) में जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट किया गया। इसके साथ ही सिविल अस्पताल में अब तक ब्रेनडेड दाताओं की ओर से कुल 447 अंग दान में मिल चुके हैं। इनके माध्यम से 429 लोगों की जान बचाई जा सकी है। अंगों में सबसे अधिक किडनी हैं। इसके अलावा लिवर, हार्ट, फेफड़े, पेंक्रियाज, आंत और हाथों का भी यहां दान किया जा चुका है।

अंगदान की गतिविधियों को तेज करने की जरूरतसिविल अस्पताल में पिछले कुछ वर्षों से अंगदान की गतिविधियां बढ़ी हैं, फिर भी अभी और बढ़ाने की जरूरत है। अंगदान के प्रति जागरूकता की आवश्यकता है। ब्रेन डेड हुए व्यक्ति के अंगों से सात से आठ जरूरतमंदों की जान बचाई जा सकती है। आज अंगों के लिए बड़ी कतार है। यदि जागरूकता आएगी तो इस कतार को कम किया जा सकता है। सभी लोगों को इस मुहिम में जुड़ने की जरूरत है।

डॉ. राकेश जोशी, चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल