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Ahmedabad civil hospital: 20 माह में 90 ब्रेन डेड बने अंगदाता, 261 लोगों का जीवन स्तर सुधरा

देश में संभवत: पहला हास्पिटल बना अहमदाबाद का सिविल अस्पताल एक ही दिन में चार किडनी और एक लिवर से मिला पांच को नया जीवन

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Ahmedabad civil hospital: 20 माह में 90 ब्रेन डेड बने अंगदाता, 261 लोगों का जीवन स्तर सुधरा

Ahmedabad civil hospital: 20 माह में 90 ब्रेन डेड बने अंगदाता, 261 लोगों का जीवन स्तर सुधरा

अहमदाबाद. kidney, liver and heart किडनी, लिवर और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अंगों के निष्क्रिय होने के कारण पीड़ादायक और मौत के साए में रहकर जीवन जीने को मजबूर 261 लोग न सिर्फ पीड़ामुक्त हो गए बल्कि उन्हें एक तरह से नया जीवन भी मिल गया है। एशिया के सबसे बड़े Civil Hospital of Ahmedabad अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में पिछले 20 माह में 90 ब्रेन डेड दाताओं से मिले अंगों से यह संभव हो पाया है। Fistr time in india संभवत: यह पहला अस्पताल है, जिसमें इतने कम समय में 90 ब्रेन डेड मरीजों के अंग दान में मिले हैं। गुरुवार को भी अस्पताल में दो ब्रेन डेड मरीजों के चार किडनी और एक लिवर का दान किया है।
सिविल अस्पताल में 89 वें अंगदाता बने हैं महिसागर जिले के 37 वर्षीय परेश कुमार डामोर। यह युवक पिछले दिनों मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुआ। स्थानीय अस्पताल के बाद गहन उपचार के लिए अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। गुरुवार को इस युवक को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया, अंगदान के संबंध में बात करने पर परिजनों ने स्वीकृति दी। जिसके बाद दो किडनी और लिविर का दान किया गया।
इसके अलावा 90वें ब्रेन डेड दाता हैं अरवल्ली जिले के 52 वर्षीय नट्टूभाई। नट्टूभाई को पिछले दिनों ब्रेन हेमरेज होने के कारण सिविल अस्पताल में भर्ती करवाया गया। काफी उपचार के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने जरूरी जांच के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया। परिजनों की ओर से स्वीकृति मिलने पर नट्टूभाई की दो किडनी का दान किया गया। इस तरह से एक ही दिन में दो ब्रेनडेड दाताओं के अंगों से पांच लोगों को जीवन मिला है।

पहले नौ माह में सात और अंतिम 11 माह में 83 बने अंगदाता

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल को रीट्राइवल सेंटर की मंजूरी दिसंबर 2020 में मिली थी। 26 दिसम्बर (2020) को पहला ब्रेन डेड दाता सामने आया था। उसके बाद सितम्बर 2021 तक सात ब्रेन डेड दाताओं के अंग दान में किए गए। गत सितम्बर से अब तक 83 ब्रेन डेड के अंग दान किए।

सोटो और जागरुकता की वजह से हुआ संभव
सिविल अस्पताल में स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यु ट्रांसपलान्ट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) की टीम की कड़ी मशक्कत और ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों की मानवीयता से अंगदान का यह कार्य जारी है। एक मरीज के अंगों को लेने के लिए पांच से सात घंटे की कड़ी मशक्कत चिकित्सा कर्मी करते हैं। ऐसे ही कुछ कारण है जिनसे बहुत कम समय में 90 ब्रेन डेड दाता सामने आए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को नया जीवन मिल सका है। संभवत: इस मामले में भी सिविल अस्पताल सबसे आगे है।

डॉ. राकेश जोशी, अधीक्षक सिविल अस्पताल