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गले में धंसे हुए तीर के साथ आई युवती को किया दर्द मुक्त

अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में किया जटिल ऑपरेशन सांसनली और मुख्य धमनी के बीच लगा हुआ था तीर

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गले में धंसे हुए तीर के साथ आई युवती को किया दर्द मुक्त

गले में धंसे हुए तीर के साथ आई युवती को किया दर्द मुक्त

अहमदाबाद. एशिया के सबसे बड़े सिविल अस्पताल में गले में धंसे हुए तीर के साथ आई युवती को दर्द मुक्त कर दिया गया। लगभग ढाई घंटे के ऑपरेशन से तीर निकाला जा सका। राजस्थान से आई इस महिला का जटिल ऑपरेशन अस्पताल के कान, नाक एवं गला (ईएनटी) विभाग के चिकित्सकों ने किया।
राजस्थान के सिरोही जिले की 18 वर्षीय मणिबेन भील के परिवार के बीच पिछले दिनों आपसी टकराव हुआ था। उस दौरान मणिबेन बीच-बचाव कर रही थी कि किसी ने तीर दाग दिया जो जो उसके गले में लग गया। था। लोहे के इस तीर के कारण वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। तीर के साथ उसे स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया जहां के चिकित्सकों ने अहमदाबाद ले जाने की सलाह दी। बिना विलंब किए मणिबेन को परिजन अहमदाबाद के सिविल अस्पताल ले आए। अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओर से की गई उचित जांच के बाद तत्काल ऑपरेशन कर तीर को निकलाने का निर्णय किया। चिकित्सकों के अनुसार यह तीर गले के सांसनली और दिमाग को रक्त पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (केरोटिड आर्टरी) के बीच में फंसा हुआ था। जिससे ऑपरेशन के दौरान मामूली चूक भी गंभीर हो सकती थी। लेकिन न्यूरो मॉनिटरिंग के साथ ईएनटी विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बेला प्रजापति, डॉ. देवांग गुप्ता एवं डॉ. ऐशा देसाई की ओर से ढाई घंटे की मशक्कत के बाद तीर को निकाला जा सका। इसके बाद युवती की हालत अच्छी बताई गई है।
ईएनटी विभाग के वरिष्ठ अन्य चिकित्सक डॉ. देवांग गुप्ता ने बताया कि मणिबेन के गले में धंसे हुए तीर की लंबाई 12 सेन्टीमीटर थी। जिसके कारण स्थिति ज्यादा नाजुक थी। एनेस्थेसिया विभाग और ईएनटी विभाग ने मिलकर यह सफल ऑपरेशन किया। डॉ. ऐषा देसाई के अनुसार शरीर में जब कोई बाहरी वस्तु लगी रहती है तो उसका निदान और संभव हो तो ऑपरेशन की जरूरत हो सकती है। समय रहते इसका उपचार किया जाना चाहिए अन्यथा गंभीर स्थिति का सामना भी करना पड़ सकता है।

अन्य राज्यों के मरीजों को भी श्रेष्ठ उपचार
अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में न सिर्फ अहमदाबाद और गुजरात बल्कि बाहरी राज्यों से आने वाले गंभीर मरीजों का भी श्रेष्ठ उपचार किया जा रहा है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र से भी यहां प्रतिदिन मरीज आते हैं।
डॉ. राकेश जोशी चिकित्सा अधीक्षक सिविल अस्पताल