बीमा की रकम के लिए भिक्षुक को कार में बिठाकर लगा दी थी आग, वर्ष 2006 से निकोल में नाम बदलकर रह रहा, क्राइम ब्रांच ने पकड़ा
अहमदाबाद. उत्तर प्रदेश के आगरा में 17 वर्ष पूर्व एक कार दुर्घटना के बाद मृत घोषित किए गए व्यक्ति को क्राइम ब्रांच की टीम ने अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र से ढूंढ निकाला। पुलिस के हाथ लगा यह आरोपी इतना शातिर है कि वर्ष 2006 से अहमदाबाद में नाम बदलकर रह रहा है।
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के पुलिस निरीक्षक एमएस त्रिवेदी व उनकी टीम ने सूचना के आधार पर राजकुमार चौधरी नामक व्यक्ति को निकोल स्थित मोहननगर चार रास्ता से मंगलवार को हिरासत में लिया। पूछताछ की गई तो वह असल में अनिलसिंह चौधरी निकला, जिसे 2006 में मृत घोषित कर दिया गया था। पूछताछ में कड़ी खुली तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।
क्राइम ब्रांच के समक्ष की गई आरोपी ने बताया कि वह उत्तरप्रदेश के गौतम बुद्धनगर जिले के भट्टा परसौल गांव का रहने वाला है। 31 जुलाई 2006 को उसने अपनी कार में एक भिक्षुक व्यक्ति को भोजन करवाने के बाद कार में बिठाया था। भोजन में बेहोश करने वाली दवाई मिलाई गई और उसके बाद आगरा शहर के रकाबगंज क्षेत्र में कार को खंभे से जानबूझकर टकरा दी तथा आग के हवाले कर दिया। कार से पहले से ही उतर गया आरोपी वहां से अहमदाबाद भाग आया। उधर, आग के कारण भिक्षुक की मौत हो गई। आरोपी के पिता ने भिक्षुक को अपना पुत्र अनिल बताया। शव को घर ले गए और अंतिम संस्कार कर दिया गया। इसके बाद परिवार को बीमा की राशि भी मिल गई।बदले नाम से बनवाए दस्तावेज
पुलिस के मुताबिक इस घटना के बाद आरोपी अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र में आ बसा। उसने अपना नाम बदलकर अनिल रख लिया। बदले हुए नाम से उसने ड्राइविंग लाइसेंस बनवा लिया। इसके बाद आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए।
अहमदाबाद आने के बाद कभी नहीं गया अपने गांव
क्राइम ब्रांच के मुताबिक आरोपी इन 17 वर्षों में कभी अपने गांव नहीं गया। जब कभी उसे अपने पत्नी और परिवार के सदस्यों से मिलना होता तो वह उन्हें दिल्ली या सूरत बुला लेता था।
अहमदाबाद में शादी की, नहीं किया पहली पत्नी से जिक्र
इस आरोपी ने अहमदाबाद में शादी कर ली थी, लेकिन इसका जिक्र उसने परिवार के किसी व्यक्ति से नहीं किया था। हालांकि परिवार के ज्यादातर सदस्यों को यह पता था कि अनिल सिंह जीवित है। पुलिस की माने तो पिता ने इस षडयंत्र में उसका साथ दिया था।