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Ahmedabad: फर्जी वीजा देकर ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश, चार गिरफ्तार

-गुजरात एटीएस की टीम ने पकड़ा, 40 से ज्यादा लोगों को ठगने का खुलासा

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Gujarat ATS

Ahmedabad. विदेश जाने की चाहत रखने वाले लोगों को फर्जी वीजा देकर लाखों रुपए ठगने वाले एक गिरोह का गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह से जुड़े चार आरोपियों को पकड़ा है। इनकी पूछताछ में 40 से ज्यादा लोगों को फर्जी वीजा देकर लाखों रुपए ठगने का खुलासा हुआ है। आरोपियों के विरुद्ध गुजरात एटीएस में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पकड़े गए आरोपियों में गांधीनगर कुडासण निवासी मयंक भारद्वाज, अहमदाबाद नवा वाडज निवासी तेजेंद्र उर्फ किशन गज्जर, मनीष पटेल और मुंबई निवासी तबरेज कश्मीरी शामिल हैं।

44 लोगों को दिया लक्जमबर्ग का फर्जी वीजाएटीएस के अनुसार ये चारों आरोपी एक संगठित गिरोह का हिस्सा है। आरोपियों की पूछताछ में सामने आया कि इस गिरोह का मुख्य आरोपी मनीष उर्फ कुमार पटेल है। यह गिरोह अब तक 44 लोगों को लक्जमबर्ग का फर्जी वीजा देकर ठग चुका है।

वीजा के नाम पर 8 से 10 लाख लेते

एटीएस के तहत सूचना मिली थी कि गांधीनगर निवासी मयंक भारद्वाज और अहमदाबाद निवासी तेजेंद्र उर्फ किशन गज्जर लोगों को लक्जमबर्ग देश व अन्य देश के फर्जी वीजा देकर ठग रहे हैं। इसके आधार पर इन दोनों को नोटिस देकर एटीएस कार्यालय बुलाया गया। इनसे की गई पूछताछ में सामने आया कि ये दोनों ही मनीष पटेल के जरिए लक्जमबर्ग देश का फर्जी वीजा बनवाते हैं। इसके लिए ये 8 से 10 लाख रुपए लेते थे।

पांच पीडि़तों का भी चला पता

जांच में इस गिरोह के शिकार हुए पांच पीडि़तों का भी पता चला। इसमें इन्होंने हिमांशु भावसार के पास से 9.50 लाख रुपए लेकर 12 मई से 9 अगस्त 2025 तक का लक्जमबर्ग का वीजा बनाया था। अर्चित पटेल को भी इस अवधि का वीजा देने के लिए 8.50 लाख रुपए लिए। निलेश पटेल से 8 लाख लेकर पांच जून से दो सितंबर का वीजा दिया था, संजय परमार से आठ लाख लेकर पांच जून से दो सितंबर का वीजा दिया था। कृणाल सोकरीवाला को 2 जून से 30 अगस्त का वीजा दिया था। इन वीजा की दिल्ली स्थित लग्जमबर्ग एम्बेसी में जांच कराने पर पता चला कि ये वीजा उनकी ओर से जारी नहीं किए गए हैं। यह सभी फर्जी हैं। इतना ही नहीं इन सभी पांचों व्यक्तियों ने पहले भी शॉर्ट टर्म बिजनेस वीजा के लिए भी आवेदन किया था। लेकिन उनका जॉब ऑफर लेटर फर्जी होने के कारण उसे नामंजूर किया गया था। इन पांच के अलावा 39 अन्य लोगों को यह गिरोह लक्मजबर्ग का वीजा देकर ठग चुका है।