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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में २५३ तथा राजकोट में २६९ बच्चों की मौत

पिछले तीन माह में...

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अहमदाबाद सिविल अस्पताल में २५३ तथा राजकोट में २६९ बच्चों की मौत

अहमदाबाद सिविल अस्पताल में २५३ तथा राजकोट में २६९ बच्चों की मौत

अहमदाबाद. गुजरात के सबसे बड़े सरकारी सिविल अस्पताल में जन्म लेने वाले बच्चों में से मौत चिन्ता का विषय है। पिछले तीन माह की बात करें तो सिविल अस्पताल में २५३ बच्चों की मौत हो गई। राजकोट के सिविल अस्पताल में यह संख्या २६९ है।
राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पताल में एक माह में हुई १०७ बच्चों की मौत की घटना के बाद गुजरात के राजकोट स्थित सिविल अस्पताल में एक ही माह में १११ नवजातों की मौत की घटना सामने आई है। हालांकि गुजरात सरकार का कहना है कि राजकोट एवं अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में पिछले महीनों हुई मौत ट्रेंड से ज्यादा नहीं हैं। एशिया के सबसे बड़े अहमदाबाद स्थित सिविल अस्पताल में गत दिसम्बर महीने में ८८ नवजातों की मौत हुई थी। जबकि राजकोट स्थित जनाना अस्पताल में १११ नवजातों ने दम तोड़ा था। अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में अक्टूबर माह में ९१ नवजातों की मौत हुई थी। नवम्बर माह में ७४ और दिसम्बर माह में ८८ की मौत हुई थी। इस तरह से तीन माह में सिविल अस्पताल में २५३ नवजातों की मौत हो गई थी। इन तीन महीनों में राजकोट के अस्पताल में २६९ नवजातों की मौत हुई थी। सबसे अधिक १११ दिसम्बर माह में हुई थी जबकि अक्टूबर माह में ८७ और नवम्बर माह में ७१ नवजातों की मौत हुई थी।
अन्य अस्पतालों के मुकाबले इसलिए ज्यादा है मृत्युदर
राज्य के अन्य अस्पतालों की तुलना में प्रमुख अस्पतालों में नवजातों की मृत्यु दर का आंकड़ा ज्यादा होता है। राज्य सरकार का कहना है कि अन्य अस्पतालों में से गंभीर मामलों को इनमें पहुंचाया जाता है। उप मुख्यमंत्री एवं राज्य के स्वास्थ्य मंत्री नितिन पटेल का कहना है कि राज्य के प्रमुख अस्पतालों में न सिर्फ गुजरात से बल्कि पड़ौसी राज्यों से भी गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। उनका कहना है कि इसके बावजूद भी यह दर ट्रेंड से अधिक नहीं है।