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साइंससिटी में जून से देखने को मिलेंगे पेंग्विन्स, शार्क

लंबी टनल में शार्क के बीच निकलने का भी रोमांच,छू भी सकेंगे मछली,दो सौ प्रकार की १२ हजार मछली-समुद्री प्रजातियां दिखेंगीं,२५१ करोड़ की लागत से बन रही एक्वाटिक साइंस गैलरी

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Gujarat science city

साइंससिटी में जून से देखने को मिलेंगे पेंग्विन्स, शार्क

अहमदाबाद. गुजरात साइंस सिटी में जून-२०१९ से आपको रंगबिरंगी छोटी से लेकर महाकाय मछलियां देखने को मिलेंगीं। अठखेलियां करते हुए सबका दिल जीत लेने वाले ५-६ अफ्रीकी पेंग्विन्स भी दिखेंगे। साथ ही आप २2 मीटर लंबी टनल में पांच प्रकार की शार्क के बीच समुद्री माहौल से होकर गुजरने का लुत्फ उठा सकेंगे। मछलियों को छूने का भी आनंद लिया जा सकेगा।
गुजरात सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से २५१ करोड़ की लागत से गुजरात साइंससिटी में एक्वाटिक साइंस गैलरी बनाई जा रही है। १३ हजार वर्ग मीटर में बन रही इस गैलरी में लोगों को २०० प्रकार की मछलियों-समुद्री-जलीय जीवों की प्रजातियों को नजदीक से देखने, समझने का मौका मिलेगा। भारत ही नहीं बल्कि अमरीकी, अफ्रीकी एवं एशिया के अलग अलग देशों में पाई जाने वाली मछली-समुद्री प्रजातियां यहां देखने को मिलेंगीं।
गाइड प्रत्येक मछली के बारे में बताएंगे भी। मछलीघर की थीम पर बने कैफेटेरिया में चाय-नाश्ता भी कर सकेंगे। यहां लाइंट एंड साउंड शो भी होगा। कंप्यूटर सिम्युलेशन के जरिए भी मछलियों के जीवनचक्र को समझाया जाएगा। इसे टर्की में बड़ी एक्वाटिक गैलरी सहित १५ एक्वाटिक गैलरी बनाने की अनुभवी न्यूजीलैंड की कंपनी के साथ भारतीय कंपनी के संयुक्त वेंचर की ओर से बनाया जा रहा है। पांच साल तक इसकी देखरेख भी यही करेंगे। द्विवेदी ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन यह जानकारी दी। इसमें साइंस सिटी के कार्यकारी निदेशक एस.डी.वोरा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरोत्तम साहू भी उपस्थित रहे।

इसके लिए छोटे से बड़े ७२ अलग-अलग प्रदर्शन टैंक बनाए गए हैं। इनमें जिनमें मछलियों और प्रजातियों को रखा जाने वाला है। इन टैंक को मछलीव प्रजाति के अनुरूप माहौल देने के लिए टैंक का अंदरूनी माहौल डिजाइन किया जा रहा है।
द्विवेदी ने दावा किया कि देश की सबसे बड़ी एक्वाटिक गैलरी होगी। गैलरी में आने वाले लोगों को समुद्री जीवों को देखने का मौका मिलेगा तो मिलेगा ही साथ ही संबंधित मछली को ऑडियो-विज्यूअल, एलईडी स्क्रीन, ४ डी थियेटर के माध्यम से एवं अंग्रेजी व हिंदी के सूचना पट के जरिए समझने का भी अवसर मिलेगा। यहां विशेष सत्र भी आयोजित होंगे।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव धनंजय द्विवेदी ने बताया कि २१ अक्टूबर २०१७ को मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इस गैलरी के निर्माण का शिलान्यास किया था। इसके निर्माण का काफी हिस्सा पूर्ण कर लिया गया है। जनवरी-२०१९ से इसमें मछलियों को लाने की शुरूआत हो जाएगी, हालांकि आम जनता के लिए इसे जून-२०१९ से खोलने की योजना है। इस बीच देखा जाएगा कि यहां लाई गई मछलियां व अन्य समुद्रीय जीवों को उनके अनुरूप वातावरण प्रदान किया जा सके। इसका पूरा ध्यान रखा गया है कि प्रत्येक समुद्री जीव व मछलियों को वो जिस देश एवं प्रदेश और वातावरण में पाई जाती हैं, वैसा ही समुद्रीय-जलीय पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सके।

यह होंगे आकर्षण
५-६ अफ्रीकी पेंग्विन्स, स्टैन्डबार शार्क, ग्रेरीफ शार्क, स्पोटेड ईगल रे, काऊनोज रे, खतरनाक कोयपू मछली, स्टिंगरेस, जैलीफिश, कोरल रीफ, ऑक्टोपस, अल्बीनो पेंग्लासियुस, कोई देखने को मिलेगी।