
Vadodara वडोदरा में 4 मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट से कैंसर का इलाज
जफर सैयद
वडोदरा. वडोदरा में मध्य गुजरात के सबसे बड़े सयाजी अस्पताल के रेडिएशन (विकिरण) ऑन्कोलॉजी विभाग में चार मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट (प्रत्यारोपण) से कैंसर का उपचार किया गया है। अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में ब्लड कैंसर और हेमटोलॉजिकल डिसऑर्डर के इलाज के बाद अब का तीसरा आयाम स्थापित किया गया है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से कैंसर आधारित विकिरण के दर्द रहित उपचार के लिए अस्पताल में करोड़ों रुपए की अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं। विभाग के अध्यक्ष डॉ. अनिल गोयल के अनुसार अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रंजनकृष्ण अय्यर के समर्थन से अब बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से कैंसर के इलाज के लिए एक अत्याधुनिक सुविधा को जोड़ा गया है।
निजी अस्पतालों में बहुत महंगा, सरकारी में लगभग नि:शुल्क उपचार
डॉ. गोयल के अनुसार नई दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. मीतकुमार की देखरेख और मार्गदर्शन में स्थानीय चिकित्सकों व चिकित्सा सहायकों की एक टीम बोन मैरो ट्रांसप्लांट के जरिए कैंसर का उपचार कर रही है और इसके अच्छे परिणाम मिल रहे हैं। कैंसर पीडि़त चार मरीजों को पिछले महीने यह उपचार लाभ लगभग नि:शुल्क प्रदान किया गया। निजी अस्पतालों में यह उपचार बहुत महंगा माना जाता है।
सीएम सेतु व्यवस्था के तहत दे रहे सेवा
डॉ. गोयल के अनुसार राज्य सरकार की ओर से सयाजी अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के लिए सीएम सेतु व्यवस्था के तहत नई दिल्ली के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. मीतकुमार वडोदरा पहुंचकर सेवा दे रहे हैं।
राज्य सरकार ने की 25 करोड़ की आधुनिक मशीनों की व्यवस्था
राज्य सरकार की ओर से कैंसर के आधुनिक उपचार के लिए सयाजी अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग में 25 करोड़ रुपए की आधुनिक मशीनों की व्यवस्था की गई है।
दिल्ली से आए डॉ. मीतकुमार वडोदरा के मूल निवासी
नई दिल्ली से वडोदरा आकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपचार का नेतृत्व करने वाले डॉ. मीतकुमार का जन्म और पालन-पोषण वडोदरा में हुआ। उन्होंने कहा कि डॉ. गोयल के माध्यम से सयाजी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अय्यर से परिचय हुआ और बहुत ही सामान्य स्थिति के मरीजों की सेवा करने पहुंचे।
आधुनिक उपचार पद्धति से उपचार के 15 दिन बाद छुटटी
डॉ मीतकुमार के अनुसार बोन मैरो ट्रांसप्लांट बहुत ही आधुनिक उपचार पद्धति है। स्थानीय चिकित्सकों, चिकित्सा सहायकों, विभाग के स्टाफ की टीम की मदद से उपचार किया बहुत अच्छा चल रहा है। दिन-रात निरंतर देखभाल करके प्रथम रोगी को केवल 15 दिनों के उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी।
11 वर्ष का किशोर भी हुआ ठीक
अब तक रक्त कैंसर पीडि़त 26 वर्ष के युवक को ऑटोलॉगस उपचार, ल्यूकेमिया पीडि़त 26 वर्ष की महिला, 11 वर्ष के किशोर व मायलोमा पीडि़त 71 वर्ष की बुजुर्ग महिला का उपचार इस प्रणाली का उपयोग कर किया गया है। मा कार्ड व पीएमजेएवाई योजना का कार्ड रखने वाले मरीजों को नि:शुल्क व अन्य मरीजों को सयाजी अस्पताल में बहुत ही रियायती दर पर कैंसर के लिए आधुनिक उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है।
डॉ. गोयल के अनुसार ल्यूकेमिया के रोगियों में रोग की अक्सर पुनरावृत्ति होती है। ऐसे रोगियों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट उपचार उपयोगी होता है। विभाग को साइबर नाइफ और टोमोथैरेपी सरीखे उपकरणों की आवश्यकता है। हालांकि वर्तमान में उपलब्ध उपकरण सुविधा के तहत सर्वोत्तम उपचार किया जा रहा है।
Published on:
29 Jun 2022 11:05 pm

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