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Dharmaj Day: नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़े रखने का माध्यम है ‘धर्मज डे’ 10101

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Dharmaj Day: नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़े रखने का माध्यम है ‘धर्मज डे’ 10101

Dharmaj Day: नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़े रखने का माध्यम है ‘धर्मज डे’ 10101

उदय पटेल

अहमदाबाद. नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और अपनी माटी की महक से जुड़े रहने के लिए गुजरात के आणंद जिले का एक गांव हर वर्ष अपने यहां दिवस मनाता है।
सैन फ्रांसिस्को (अमरीका) से लेकर सुवा (फिजी) तक और डबलिन (आयरलैण्ड) से लेकर डरबन (दक्षिण अफ्रीका) तक बसने वाले धर्मज गांव के लोग हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती व राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर धर्मज दिवस मनाते हैं। छ गाम पाटीदार समाज और धरोहर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस समारोह के लिए कुछ युवा यहां पहुंच चुके हैं।

कोरोना को देखते हुए हाइब्रिड मोड

पिछले लगातार 16 वर्षों से मनाए जा रहे आणंद जिले की पेटलाद तहसील के डॉलर से भरपूर इस गांव में कोरोना के चलते इस बार यह आयोजन हाइब्रिड मोड में होगा। कोरोना को लेकर सरकार की दिशानिर्देशों का पालन करते हुए सिर्फ 400 लोगों की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी।

डेनिम रंग होगा

11 हजार की आबादी वाला यह गांव इस दिवस पर डेनिम ब्लू रंग से सराबोर होगा। नई पीढ़ी के डेनिम के प्रति आकर्षण को देखते हुए यह रंग चुना गया है।

डीप रूट्स-स्वीट फ्रू ट्स का थीम

इस बार की थीम का नाम भी डीप रूट्स-स्वीट् फ्रूट्स रखा गया है। मतलब यदि जड़ें गहरी होंगी तो फल भी ज्यादा मीठा होगा।

जोहते हैं बाट

परदेस में बसने वाले लोग दीपावली के बाद अपने गांव आने की बाट जोहते हैं। लेकिन पिछले दो वर्षों से वैश्विक महामारी के चलते इसमें थोड़ी परेशानी आई। पिछली बार यह दिवस पूरी तरह से वर्चुअल मनाया गया था। यहां के लोग व्यापार, रोजगार, आर्थिकोपार्जन, उच्च शिक्षा व वैश्विक स्तर पर करियर के लिए अन्य देशों में बसे हैं।

ज्यादातर लोग विदेश में

इस गांव के ज्यादातर लोग विदेशों में रहते हैं। इनमें मुख्यतया करीब 1400 परिवार लंदन सहित ब्रिटेन, 700 से ज्यादा परिवार न्यूजर्सी सहित अमरीका, 200 परिवार कनाडा, करीब 150 परिवार न्यूजीलैण्ड और अफ्रीका तथा करीब 100 परिवार आॉस्ट्रेलिया में रहते हैं।

खासी सुविधाएं हैं यहां

पाटीदार बहुल इस गांव में अंडरग्राउंड ड्रेनेज सिस्टम, बेहतरीन सडक़, स्ट्रीट लाइट की पूरी सुविधा है। ज्यादातर घरों में यहां पर ताले दिखते हैं। यहां 12-15 निजी व राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखाएं हैं। गांव में किडनी केन्द्र, कैंसर शोध सुविधा, आंख-दांत का अस्पताल, मेटरनिटी अस्पताल, पोलियो व ऑर्थोपेडिक अस्पताल, ग्लुकोमा रिसर्च सेंटर है। इस गांव की अपनी कॉफी-टेबुल बुक और अपनी वेबसाइट है।

अपनी डिजीटली वंशावली

गांव की अपनी डिजीटलीकृत वंशावली है जिसमें अब तक करीब 12 हजार नाम जुड़ चुके हैं। इस वंशावली में गांव की पुत्रियों व पुत्रवधुओं को स्थान दिया गया।

एनआरडी कहलाना पसंद करते हैं इस गांव के लोग

इस गांव के लोग खुद को एनआरआई (प्रवासी भारतीय) या एनआरजी (प्रवासी गुजराती) की बजाय एनआरडी (नॉन रेसिडेंट धर्मिजन्स) कहलाना पसंद करते हैं।

देश के पहले गैर कांग्रेसी वित्त मंत्री का गांव

पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई वाली देश की पहली गैर कांग्रेसी सरकार में वित्त मंत्री एच एम पटेल इसी गांव के थे। एनडीडीबी की अध्यक्ष रह चुकीं डॉ. अमृता पटेल उनकी पुत्री हैं।

वरिष्ठ लोगों की रही यह सोच

नई पीढ़ी को अपनी मिट्टी से जुड़े रहने के लिए यहां के वरिष्ठ लोगों ने इस आयोजन की बात सोची थी। यहां की चौथी पीढ़ी अब दुनिया भर में रहती है। इस आयोजन से जड़ों से जुड़े रहने को काफी हद तक सफलता मिल रही है। यह लगातार 16वां वर्ष है जब इसका आयोजन किया जा रहा है।

राजेश पटेल, आयोजक, टीम धर्मज