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आणंद वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सकों ने जटिल सिजेरियन कर बचाई घोड़ी की जान

गुजरात में पहली बार ऐसी सफल सर्जरी का दावा आणंद. कामधेनु विश्वविद्यालय के तहत आणंद के आणंद वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सकों ने जटिल सिजेरियन कर घोड़ी की जान बचाई। गुजरात में घोड़ी पर इस प्रकार का सफल सिजेरियन ऑपरेशन पहली बार करने का दावा किया गया है।जानकारी के अनुसार, बोटाद जिले के अश्व पालक जीतु […]

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गुजरात में पहली बार ऐसी सफल सर्जरी का दावा

आणंद. कामधेनु विश्वविद्यालय के तहत आणंद के आणंद वेटरनरी कॉलेज के चिकित्सकों ने जटिल सिजेरियन कर घोड़ी की जान बचाई। गुजरात में घोड़ी पर इस प्रकार का सफल सिजेरियन ऑपरेशन पहली बार करने का दावा किया गया है।
जानकारी के अनुसार, बोटाद जिले के अश्व पालक जीतु धाधल की 11 महीने की गर्भवती घोड़ी में अचानक पेट दर्द के लक्षण दिखाई देने पर उसे आणंद वेटरनरी कॉलेज लाया गया। वेटरनरी सर्जरी एवं रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. जिग्नेश वडालिया ने जांच में पता लगाया कि घोड़ी के गर्भाशय में मरोड़ (ट्विस्ट) आ गई है।
सामान्यतः ऐसी स्थिति में रोलिंग पद्धति से मरोड़ खोलने का प्रयास किया जाता है, लेकिन इस मामले में वह सफल नहीं हो सका। परिणामस्वरूप घोड़ी की जान बचाने के लिए तत्काल सिजेरियन ऑपरेशन करना पड़ा। अश्व पालक की सहमति के बाद डॉ. जिग्नेश वडालिया, डॉ. रोहित गोसाई, डॉ. फोरम आसोड़िया, डॉ. अनुप पटेल एवं उनकी टीम ने घोड़ी को बेहोश कर यह जटिल ऑपरेशन किया।
यह ऑपरेशन लगातार 3 से 4 घंटे तक चला, जिसमें घोड़ी के पेट से मृत बच्ची को बाहर निकालकर घोड़ी की जान बचा ली गई। डॉ. वडालिया ने बताया कि सामान्यतः घोड़ी में सिजेरियन के बाद पेट में संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है और संक्रमण तेजी से पूरे पेट में फैल जाता है। इसी कारण गुजरात में अब तक इस प्रकार के पेट के ऑपरेशनों में घोड़ी की जान नहीं बच पाई थी।
चिकित्सकों की टीम ने पूरी सटीकता और सावधानी के साथ सर्जरी की और पेट में संक्रमण नहीं होने दिया, जिससे घोड़ी की जान बच सकी। इस प्रकार गुजरात में पहली बार इस तरह के ऑपरेशन में घोड़ी को बचाया गया है, जिसे राज्य की पहली घटना माना जा सकता है। ऑपरेशन के बाद घोड़ी को लगातार 11 दिनों तक डॉ. रोहित गोसाई और डॉ. अनुप पटेल की निगरानी में रखा गया। स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार होने पर 12वें दिन घोड़ी को छुट्टी दे दी गई।