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जीसीएस हॉस्पिटल में जटिल ऑपरेशन, युवक के जांघ से निकाली 26.5 सेमी की गांठ

-लिम्ब-स्पेरिंग (पैर बचाने वाली) इस सर्जरी से मरीज को स्थायी विकलांगता से बचाने में मिली सफलता, 33 वर्षीय युवक को चार साल से थी गांठ, दो साल से बढ़ गई थी समस्या
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अहमदाबाद

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nagendra singh rathore

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Updated: 28 Jun 2026, 10:30 PM IST

GCS Hospital operation

युवक की जांघ से निकाली गई गांठ।

Ahmedabad: कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए शहर के जीसीएस मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (जीसीएस हॉस्पिटल) के ऑन्को सर्जरी विभाग की टीम ने 33 वर्षीय पुरुष की बाईं जांघ से लगभग 26.5 गुणा 20 सेमी की 'सॉफ्ट टिश्यू ट्यूमर' (गांठ) निकाली है।

डॉ. संकेत देसाई ने बताया कि इस जटिल सर्जरी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मरीज के चलने और पैर के मूवमेंट के लिए जिम्मेदार मुख्य नसों को बिना कोई नुकसान पहुंचाए गांठ को निकालने में सफलता मिली है। मरीज को लगभग चार साल पहले अपनी बाईं जांघ में एक सामान्य सूजन (गांठ) महसूस हुई थी। शुरुआत में इसमें कोई दर्द नहीं था, लेकिन समय के साथ यह धीरे-धीरे बढ़ती गई। पिछले दो वर्षों के दौरान, मरीज को तेज दर्द होने लगा और चलने-फिरने में भी दिक्कत आने लगी। अंतिम चार महीनों में इस गांठ का आकार तेजी से बढ़ा, जिससे सॉफ्ट टिश्यू कैंसर (मैलिग्नेंसी) होने का संदेह पैदा हुआ।

विस्तृत एमआरआइ से पता चला कि जांघ के मस्कुलर हिस्से में एक विशाल ट्यूमर फैला हुआ था। वहीं पेट-सीटी स्कैन में यह गांठ सक्रिय पाई गई, लेकिन राहत की बात यह थी कि यह शरीर के अन्य हिस्सों में नहीं फैली थी। साइटोलॉजी रिपोर्ट में 'मिक्सोइड सॉफ्ट टिश्यू नियोप्लाज्म' का संकेत मिला, जिसके लिए तत्काल सर्जिकल उपचार अनिवार्य था।

सर्जरी में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर शिएटिक नर्व और कॉमन पेरोनियल नर्व जैसी मुख्य नसों से पूरी तरह सटा था। यदि इनमें से किसी भी नस को थोड़ा सा भी नुकसान पहुंचता, तो मरीज को स्थायी रूप से फुट ड्रॉप (पैर के पंजे का लटक जाना), आजीवन विकलांगता, खुद से चलने की क्षमता खो देना और लंबे समय तक ऑर्थोटिक सपोर्ट (कैलीपर्स) पर निर्भर रहने की नौबत आ सकती थी। जटिलताओं के बावजूद टीम ने बेहद सटीकता के साथ 'वाइड लोकल एक्सीजन' सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

पैर का मूवमेंट सामान्य

चिकित्सकों का दावा है कि अब सामान्य रूप से पैर का मूवमेंट मरीज कर पा रहा है। निकाले गए ट्यूमर को विस्तृत बायोप्सी (हिस्टोपैथोलॉजिकल इवैल्यूएशन) के लिए भेजा गया है, ताकि ट्यूमर के सटीक प्रकार का पता चल सके और आगे के इलाज की रूपरेखा तय की जा सके।