
अहमदाबाद साबरमती रिवरफ्रंट पर स्थित सोमनाथ भूदर ना आरे पर जलयात्रा के लिए बांधा गया शामियाना।
Ahmedabad. शहर में 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा से पहले सोमवार को ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा के दिन जलयात्रा निकाली जाएगी। ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर से सुबह आठ बजे जलयात्रा का आरंभ होगा। 108 कलशों के साथ बड़ी संख्या में साधू-संतों की मौजूदगी में जल यात्रा मंदिर से साबरमती रिवरफ्रंट पर सोमनाथ भूदर के आरे तक पहुंचेगी। यहां गंगा पूजन किया जाएगा। इसके बाद साबरमती नदी के मध्य जाकर कलश में जल लिया जाएगा। इसके साथ ही 108 कलशों में जल भरा जाएगा।
अमूमन नाव से साबरमती नदी के मध्य जाकर कलश में जल लिया जाता है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि इस बार पहली बार जल लाने के लिए क्रूज का उपयोग किया जाएगा। क्रूज में सवार होकर मंदिर के महंत दिलीपदास महाराज, मंदिर के न्यासी महेंद्र झा, गंगा पूजन महोत्सव के मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी साबरमती नदी के मध्य जाकर जल लेंगे। इन 108 कलशों का जल लेकर जल यात्रा निज जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी।
108 कलशों के जल से मंदिर में भगवान जगन्नाथ का जलाभिषेक किया जाएगा। उससे पहले षोडशोपचार पूजन विधि की जाएगी। इस दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल देखने को मिलेगा।इस अवसर पर अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष अविचलदास महाराज, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा, सांसद हसमुख पटेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, अहमदाबाद शहर के विधायकगण व अन्य मौजूद रहेंगे।
पूरे साल में सिर्फ एक दिन यानी जल यात्रा के दिन ही षोडशोपचार पूजन विधि के बाद भगवान जगन्नाथ को अतिविशिष्ट-गजवेश रूप में श्रृंगारित किया जाएगा। वे भगवान गणपति के स्वरूप में नजर आएंगे। इस स्वरूप के दर्शन साल में सिर्फ इसी दिन होते हैं। इस स्वरूप के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में उमड़ते हैं।
सोमवार को जलयात्रा, पूजन विधि के बाद शाम को भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ सरसपुर स्थित उनके ननिहाल पहुंचेंगे। वे 15 दिनों तक सरसपुर में रहेंगे। ऐसे में भगवान के स्वागत के लिए सरसपुर स्थित रणछोड़ मंदिर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। लोग स्वागत के लिए उत्सुक हैं। रणछोड़राय मंदिर के निकट बने मंडप में अभी से चहल-पहल बढ़ गई है। भगवान के ननिहाल में मौजूदगी के चलते प्रतिदिन सुबह और शाम बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में भजन-कीर्तन, आरती, गीत-संगीत और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। भगवान कृष्ण को प्रिय माने जाने वाले माखन, मिश्री और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का भोग भी प्रतिदिन अर्पित किया जाएगा।
Published on:
28 Jun 2026 10:17 pm
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