
अहमदाबाद के मेडिसिटी स्थित आंख अस्पताल में मरीजों की जांच करते चिकित्सा कर्मी।
Ahmedabad आंखों की दृष्टि छीनने वाले बड़े कारणों में एक ग्लूकोमा (काला मोतिया) को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस रोग के प्रति लोगों को बहुत जागरूक होने की जरूरत है।विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के उपलक्ष्य में अहमदाबाद मेडिसिटी स्थित एम एंड जे आई इंस्टीट्यूट में पिछले दिनों आयोजित ग्लूकोमा अवेयरनेस वीक के दौरान 1200 लोगों के आंखों की जांच की गई, जिसमें से 150 को ग्लूकोमा के लक्षण मिले हैं। इतनी संख्या में लोगों को ग्लूकोमा का खतरा मंडराना चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों के अनुसार ग्लूकोमा धीरे-धीरे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाता है और समय पर पहचान न होने पर स्थायी नेत्रहीनता का कारण बन सकता है।नियंत्रण में रखा जा सकता है ग्लूकोमा
एम.एंड जे. इंस्टीट्यूट की ग्लूकोमा विशेषज्ञ डॉ. निहारिका शाह के अनुसार अस्पताल में दो विशेष यूनिट में अत्याधुनिक एनसीटी जैसे उपकरणों से जांच की जाती है। ग्लूकोमा को पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन लेजर या सर्जरी से नियंत्रण संभव है। नियमित आंखों की दवाएं लेने से अधिकांश मामलों में सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लगभग 1.2 करोड़ लोग और गुजरात में लगभग 14 लाख लोग ग्लूकोमा से प्रभावित हैं। नियमित आंखों की जांच कराने के साथ साथ असामान्य लक्षण को नजरअंदाज न करने की सलाह भी विशेषज्ञों ने दी है।
अस्पताल की अन्य वरिष्ठ नेत्र रोग चिकित्सक डॉ. पूर्वी भगत के अनुसार बच्चों में भी ग्लूकोमा की संख्या चिंताजनक है। हर साल लगभग 800 बच्चों के नए केस सामने आते हैं। समय पर इलाज मिलने पर उनकी दृष्टि बचाई जा सकती है। ग्लूकोमा ओपीडी में हर महीने लगभग 1800 से 2000 मरीज आते हैं, जिनमें लगभग आधे नए मरीज होते हैं।
अस्पताल के आरएमओ डॉ. उमंग मिश्रा के अनुसार जनजागरूकता बढ़ाने के लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने छोटे नाटक के माध्यम से रोग के लक्षण और उपचार समझाए। अस्पताल में इस रोग की जांच और उपचार निशु्ल्क होता है। इस रोग के प्रति लोगों को सतर्क होने की जरूरत भी बताई। इस जागरूकता सप्ताह के दौरान बड़ी संख्या में ग्लूकोमा के लक्षण वाले मरीज सामने आए हैं।
Updated on:
15 Mar 2026, 10:46 PM IST
Published on:
15 Mar 2026, 10:46 PM IST
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