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Ahmedabad News: GNLU सजा के नए प्रभावी प्रावधानों पर शोध करेगा जीएनएलयू

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Ahmedabad News: GNLU सजा के नए प्रभावी प्रावधानों पर शोध करेगा जीएनएलयू

Ahmedabad News: GNLU सजा के नए प्रभावी प्रावधानों पर शोध करेगा जीएनएलयू

अहमदाबाद. लोग अपराध क्यों करते हैं उसका पता लगाने के लिए गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिर्टी (जीएनएलएयू) ने सेंटर फॉर रिसर्च इन क्रिमिनोलॉजी साइंसेस की शुरुआत की है। यह सेंटर न सिर्फ अपराध के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर शोध करेगा बल्कि लोगों को किस अपराध के लिए किस प्रकार की प्रभावी सजा दी जाए जिससे लोगों का पैसा, सरकार का समय बचे उस पर भी शोध करेगा।

जीएनएलयू के निदेशक डॉ. एस. शांताकुमार ने बताया कि जीएनएलयू में स्थापित किए गए सेटंर फॉर रिसर्च इन क्रिमिनोलॉजी साइंसेस की विशेषता यह है कि यह इस क्षेत्र के सभी मुख्य पहलुओं पर काम करेगा, जिसमें क्रिमिनोलॉजी, विक्टिमोलॉजी और पीनोलॉजी शामिल है। अमूमन यूनिवर्सिटियों में एक या दो सेंटर ही होते हैं। गुजरात में रक्षा शक्ति यूनिवर्सिटी में सेंटर फॉर क्रिमिनोलॉजी है। इस केन्द्र में न सिर्फ व्यक्ति अपराध क्यों करता है उसके पीछे के कारणों पर शोध की जाएगी बल्कि दंडित करने के अलग अलग मॉडल को भी खोजा जाएगा। इसके अलावा अपराध करने वालों को कैसे समाज की मुख्यधारा से फिर जोड़ा जाए उसके भी तरीकों पर शोध होगी। इन शोध के निष्कर्षों की रिपोर्ट पर सरकार को उचित सिफारिशें की जाएंगीं।
इस सेंटर सहित जीएनएलयू में स्थापित अलग अलग क्षेत्र में कार्यरत शोध केन्द्रों की संख्या 15 हो गई है।

पुलिस अकादमिक इंटरेक्शन फोरम का भी गठन
शांताकुमार ने बताया कि जीएनएलयू में इस सेंटर के साथ ही पुलिस अकादमिक इंटरेक्शन फोरम का भी गठन किया गया है। गुजरात पुलिस के सहयोग से स्थापित यह सेंटर शैक्षणिक और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल, संपर्क और चर्चा का प्लेटफॉर्म स्थापित करेगा। इस फोरम के तहत यूनिवर्सिटी में एक उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी की यूनिवर्सिटी में उपस्थिति रहेगी।

सेंटर फॉर एयर एंड स्पेस लॉ की शुरुआत
शांताकुमार ने बताया कि कुछ दिनों पहले ही जीएनएलयू में सेंटर फॉर एयर एंड स्पेस लॉ की शुरुआत की गई है। यह सेंटर वायु और अंतरिक्ष क्षेत्र मौजूदा प्रावधानों को बेहतर बनाने, इस दिशा में शिक्षा, शोध और प्रशिक्षण पर काम करेगा। ऐसे में जब पूरा विश्व अन्य ग्रहों पर जिंदगी की संभावनाओं की खोज में जुटा है और अंतरिक्ष में गतिविधियां बढ़ रही हैं, उसे देखते हुए नए प्रावधानों की जरूरत है। ऐसे प्रावधानों पर यह शोध काम करेगा।

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