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जीसीआरआइ में 2000 किशोरियों को लगाई एचपीवी वैक्सीन

Ahmedabad गर्भाशय के मुख का कैंसर महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग से इसे रोका जा सकता है। इसी के तहत अहमदाबाद स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ) में अब तक 2000 से अधिक किशोरियों को राहत दर पर एचपीवी वैक्सीन दी जा […]

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GCRI

File photo

Ahmedabad गर्भाशय के मुख का कैंसर महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है, लेकिन ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) वैक्सीन और नियमित स्क्रीनिंग से इसे रोका जा सकता है। इसी के तहत अहमदाबाद स्थित गुजरात कैंसर एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (जीसीआरआइ) में अब तक 2000 से अधिक किशोरियों को राहत दर पर एचपीवी वैक्सीन दी जा चुकी है।जीसीआरआइ निदेशक डॉ. शशांक पंड्या का कहना है कि सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका वैक्सीन और समय पर जांच है। महिलाएं नियमित रूप से स्क्रीनिंग कराएं तो शुरुआती अवस्था में रोग पकड़ा जा सकता है, जीवन बचाया जा सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के अनुसार 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को एचपीवी वैक्सीन के 1 या 2 डोज, जबकि 21 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 6 माह के अंतराल पर 2 डोज लेने की सलाह दी जाती है।

सर्वाइकल कैंसर मरीज सबसे ज्यादा 40-60 साल के बीच

उनके अनुसार विश्व स्तर पर हर साल करीब 6.6 लाख नए केस दर्ज होते हैं, जिनमें से 1.27 लाख भारत के हैं। भारत में हर चार मिनट में एक महिला को कैंसर की पहचान होती है। हर सात मिनट में एक महिला की मौत हो जाती है। जीसीआरआइ में 2021 से नवंबर 2025 तक कुल 4301 केस दर्ज हुए। इनमें गुजरात के 2851 केस और अन्य राज्यों से 1450 केस शामिल हैं। सर्वाइकल कैंसर महिला मरीजों में 41 से 60 वर्ष के सबसे अधिक मरीज हैं।

जीसीआरआइ में वर्ष 2021 से 2025 नवंबर तक कुल दर्ज हुए मरीजों में एचआइवी पीड़ित महिलाओं में एचपीवी संक्रमण 21 फीसदी से अधिक हैं।

5.7 फीसदी में एचपीवी संक्रमण की पहचान

निदेशक पंड्या ने बताया कि नवंबर 2021 से जीसीआरआइ ने 17,400 से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग की, जिनमें 5.7 प्रतिशत में एचपीवी संक्रमण पाया गया। एचआईवी पीड़ित महिलाओं में यह दर 21.1 प्रतिशत तक रही। जनवरी 2026 में राज्यभर में 21 कैंप आयोजित किए गए।

शिविर में 118 मरीजों को कैंसर की पुष्टि

जीसीआरआइ की ओर से 2022 से शुरू नि:शुल्क स्क्रीनिंग ओपीडी में अब तक 50,000 से अधिक नागरिकों की जांच हुई, जिनमें 118 मरीजों में कैंसर शुरुआती अवस्था में पकड़ा गया।

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