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Gujarat: गुजरात विधानसभा में लगातार दूसरे दिन 11 विधायक निलंबित, वॉकआउट

Gujarat assembly, 10 Congress MLAs, Jignesh Mevani, suspended

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Gujarat: गुजरात विधानसभा में लगातार दूसरे दिन 11 विधायक निलंबित, वॉकआउट

Gujarat: गुजरात विधानसभा में लगातार दूसरे दिन 11 विधायक निलंबित, वॉकआउट

गुजरात विधानसभा सत्र के दूसरे और अंतिम दिन गुरुवार को विपक्षी कांग्रेस ने सदन में हंगामा किया। सदन में लम्पी वायरस और निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा छाया रहा। जहां लम्पी वायरस के मुद्दे पर कांग्रेस ने वॉक आउट किया। वहीं स्थानीय निकाय में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर हंगामे के चलते कांग्रेस के 10 विधायक व निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी को दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया।
हुआ यूं कि जब सदन में गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) संबंधी विधेयक पर चर्चा चल रही थी तभी कांग्रेस विधायक बलदेवजी ठाकोर ने अचानक निकायों में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की मांग की। स्पीकर नीमा आचार्य के ठाकोर की इस मांग को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी वेल की तरफ आए। इसके बाद ठाकोर के साथ-साथ कांग्रेस के अन्य विधायक-विमल चुडास्मा, रघु देसाई व विक्रम माडम सहित करीब दस विधायक वेल में घुस गए। इनके साथ आए अन्य विधायकों ने प्लेकार्ड के साथ ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दो, जाति आधारित गणना की मांग के साथ नारेबाजी की।
कांग्रेस विधायकों के इस विरोध के चलते संसदीय मामलों के मंत्री राजेन्द्र त्रिवेदी ने स्पीकर से अनुचित व्यवहार के लिए कांग्रेस विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके बाद स्पीकर ने इन 11 विधायकों को निलंबित किया। इससे पहले बुधवार को भी अनुचित व्यवहार के चलते निर्दलीय विधायक मेवाणी व 11 कांग्रेसी विधायकों को सदन से दिन भर के लिए निलंबित कर दिया गया था।
कुछ विधायकों को सार्जेन्ट ने तब बाहर निकाला जब ये विधायक निलंबित किए जाने के बावजूद सदन से बाहर निकलने से इन्कार कर रहे थे। इन विधायकों के निलंबन और इन्हें बाहर निकाले जाने के विरोध में कांग्रेस के अन्य विधायकों ने सदन से फिर से वॉकआउट किया। इस तरह लगातार दूसरे दिन मेवाणी सहित कांग्रेस के विधायकों को निलंबित किया गया। हालांकि कुछ देर बाद ये विधायक विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेने के लिए वापस सदन में आए।

पंचायत में ओबीसी को मिलना चाहिए 27% आरक्षण

वरिष्ठ कांग्रेस विधायक अमित चावड़ा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि स्थानीय पंचायत में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिया जाना चाहिए क्योंकि यह राज्य की आबादी के 50 फीसदी हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पता चला है कि अधिकारी राज्य में ओबीसी आबादी के बारे में गलत डाटा मुहैया करा रहे हैं। इस तरह चुनावी प्रणाली से ओबीसी और ज्यादा गायब हो जाएंगे। इसलिए 27 फीसदी आरक्षण के अलावा कांग्रेस ने जाति आधारित जगनणना की भी मांग की है। लेकिन भाजपा सरकार इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार नहीं है।