
गुजरात सिर्फ देशी-विदेशी पर्यटकों की ही पसंद नहीं बन रहा है, बल्कि प्रवासी पक्षियों को भी रास आ रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि इस साल 2024 में गुजरात के विभिन्न तालाबों, जलाशयों और पक्षी अभयारण्यों में 18-20 लाख प्रवासी पक्षियों ने डेरा डाला है। गुजरात सरकार की ओर से लगातार जलाशयों, पशु-पक्षियों के संरक्षण की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। 4 दिसंबर को विश्व वन्य जीव संरक्षण दिवस मनाया जाता है।
गुजरात वन विभाग सूत्रों के तहत वर्ष 2024 में राज्य के विभिन्न जल-प्लावित क्षेत्रों, झीलों, जलाशयों में 18 से 20 लाख प्रवासी पक्षी देखे गए। वर्ष 2010 में थोल पक्षी अभयारण्य में 31,380 पक्षी पहुंचे थे, जो 2024 में 1.11 लाख से अधिक दर्ज किए गए। नल सरोवर पक्षी अभयारण्य में वर्ष 2010 में 1.31 लाख से अधिक प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए थे, जबकि वर्ष 2024 में 3.62 लाख से अधिक पक्षी दर्ज किए गए हैं। ये दर्शाता है कि बीते 14 वर्षों में थोल में 355 और नलसरोवर में 276 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
गुजरात के वन विभाग की ओर से कराई गई पशु-पक्षी गणना 2023 के तहत राष्ट्रीय पक्षी मोर की संख्या 2.85 लाख से ज्यादा दर्ज की गई है। नील गाय की संख्या 2.24 लाख से ज्यादा, जबकि बंदर दो लाख से ज्यादा मिले हैं। जंगली सुअर और चित्तल एक लाख से ज्यादा दर्ज किए गए। काले हिरण की संख्या 9,170 दर्ज की गई। सांभर- 8,221, चिंकारा 6,208, सियार 2,299, तेंदुए 2,274 रेकॉर्ड किए गए हैं। 2,143 गिद्ध, 1,484 वणियर, एक हजार से अधिक चोसिंगा, इसके अलावा भेडि़ए, भालू सहित 21 प्रजाति के कुल 9.53 लाख से अधिक पशु-पक्षी व जानवर मिले हैं।
गुजरात में वर्ष 2020 की अंतिम गणना के अनुसार, 674 एशियाई शेरों हैं। जबकि 2024 में हुई डॉल्फ़िन गणना के अनुसार, राज्य में 680 डॉल्फ़िन दर्ज की गई हैं। इसके अलावा 7,672 जंगली गधे दर्ज किए गए हैं, जो कच्छ के घुड़खर अभयारण्य में दर्ज किए गए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह संख्या काफी अच्छी है।
Updated on:
03 Dec 2024 10:31 pm
Published on:
03 Dec 2024 10:30 pm
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