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अहमदाबाद

गुजरात: वर्ष 2031-32 में बिजली की मांग होगी 36 हजार मेगावाट, कोयला, लिग्नाइट के जरिए होगी पूरी

गुजरात में जीयूवीएनएल और जीएमडीसी ने भविष्य की बिजली मांग पूरा करने के लिए हाथ मिलाया है।

अहमदाबादJun 25, 2024 / 10:35 pm

nagendra singh rathore

GMDC Mou

जीयूवीएनएल और जीएमडीसी के अधिकारी एमओयू पर हस्ताक्षर करने के दौरान।

गुजरात में हो रहे औद्योगिक और शहरी विकास को देखते हुए वर्ष 2031-32 तक राज्य की पीक अवर्स के दौरान बिजली की मांग बढ़कर 36 हजार मेगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है। वर्ष 2023-24 में यह 24544 मेगावॉट रेकॉर्ड की गई है। आगामी 8 सालों में 11456 मेगावॉट बिजली की मांग बढ़ने पर भी बिजली की आपूर्ति चौबीस घंटे सुनिश्चित करने के लिए गुजरात सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय किया है। इसके तहत मंगलवार को गुजरात सरकार के ऊर्जा विभाग और खनिज विभाग की दो महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण कंपनियों ने हाथ मिलाया है।
मंगलवार को गुजरात राज्य के ऊर्जा मंत्री कनू देसाई की उपस्थिति में गुजरात ऊर्जा विकास निगम (जीयूवीएनएल) और गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कोर्पोरेशन (जीएमडीसी) ने राज्य की लंबे समय की बिजली जरूरत को पूरा करने के लिए एक दूसरे का सहयोग करने के लिए करार किया है। इसके तहत बिजली उत्पादन के लिए नए पावर प्लांट स्थापित करने और मौजूदा पावर प्लांट की क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। यह पावर प्लांट कोयला और लिग्नाइट आधारित होंगे। इसके लिए जरूरत का कोयला व लिग्नाइट इन पावर प्लांट को उपलब्ध कराने के लिए यह करार किया गया है।
ऊर्जा मंत्री कनू देसाई ने कहा कि गुजरात की भविष्य की बिजली की मांग को पूरा करने की दिशा में यह एमओयू एक महत्वपूर्ण कदम है। जीयूवीएनएल और जीएमडीसी यह दोनों ही कंपनियां सामूहिक समझदारी और व्यूहात्मक हिस्सेदारी के जरिए राज्य की बिजली की मांग को पूरा करने के लिए कार्य करेंगी। गुजरात में बीते पांच सालों के दौरान बिजली की मांग में छह प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर के हिसाब से इजाफा हुआ है। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की 20वीं इलैक्टि्रक पावर सर्वे (ईपीएस) रिपोर्ट में बताई गई बिजली मांग के अनुरूप कदम उठाए जा रहे हैं।

पीकअवर्स की मांग पूरा करने के लिए पहल

ऊर्जामंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार राज्य में कार्बन फुट प्रिंट को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत राज्य में विंड एनर्जी, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन इसके साथ राज्य की बढ़ रही बिजली की मांग और लोड बैलेंसिंग तथा पीक अवर्स के दौरान बढ़ने वाली बिजली की मांग पूरा करना भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में यह एमओयू महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके लिए सरकार कोयला और लिग्नाइट आधारित बिजली उत्पादन पर भी जोर दे रही है।

जीएमडीसी को ओडिशा में कोयला खनन की मंजूरी

ऊर्जा मंत्री देसाई ने बताया कि जीएमडीसी को भारत सरकार ने ओडिशा के अंगुल जिले के बेत्रणी पश्चिम और सुंदरगढ़ जिले के बुरापहर में कॉमर्शियल कोयला खानों का आवंटन किया है। इन दोनों खानों में करीब 660 मिलियन मैट्रिक टन कोयला रिजर्व प्राप्त किया जा सकता है। यहां जियोलॉजिकल रिजर्व 1700 मिलियन मैट्रिक टन है। इससे 4400 मेगावाट क्षमता के थर्मल बिजली उत्पादन में मदद मिलेगी। इसके अलावा जीएमडीसी के पास गुजरात में लिग्नाइट की खानें हैं, जिन्हें भी कार्यरत किया जा रहा है। इससे 1250 मेगावॉट लिग्नाइट आधारित बिजली पैदा हो सकती है। ऐसे में राज्य के लोगों को दिन रात बिजली देने के लिए जरूरी कोयला और लिग्नाइट उपलब्ध हो सकेगा।

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