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पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते गुजरात का प्लास्टिक उद्योग प्रभावित, एक माह का ही बचा कच्चा माल

-30 दिन में 50 से 70 फीसदी बढ़े कच्चे माल के दाम, 15 हजार छोटे कारखाने ठप, एक्सपोर्ट व्यवसाय को एक से दो बिलियन डॉलर का नुकसान, जीएसपीएमए की जीएसटी, वर्किंग कैपिटल पर राहत की मांग

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अहमदाबाद में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते जीएसपीएमए के पदाधिकारी।

Ahmedabad. पश्चिम एशिया में ईरान-इजराइल-अमरीका के बीच जारी युद्ध के चलते गुजरात का प्लास्टिक उद्योग प्रभावित हुआ है। स्थिति ऐसी है कि प्लास्टिक के 15 हजार के करीब छोटे कारखाने ठप हो गए हैं। अन्य फैक्टि्रयों में करीब एक महीने का ही कच्चा माल बचा है। युद्ध के चलते और होर्मुज का रास्ता बंद होने के चलते प्लास्टिक उद्योग के लिए जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। ऐसे में कच्चे माल की कीमत 30 दिन में ही 50-70 फीसदी तक बढ़ गई है। निजी नहीं बल्कि सरकारी कंपनियां भी प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतें आए दिन बढ़ा रही हैं। एक महीने में उद्योग को एक से दो बिलियन डॉलर एक्सपोर्ट का नुकसान हुआ है।

गुजरात स्टेट प्लास्टिक मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (जीएसपीएमए) के अध्यक्ष अनीष पटेल ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ईरान-इजराइल-अमरीका के युद्ध का प्लास्टिक उद्योग पर भारी असर पड़ रहा है। युद्ध शुरू होने के तीन -चार दिन के बाद से ही अब तक एक महीने में कच्चे माल की कीमत में 50-70 फीसदी की वृद्धि हो गई है। सप्लाई चेन प्रभावित हुई है और ऑर्डर कैंसल हो रहे हैं।

राज्य में 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्री

उन्होंने बताया कि गुजरात में 50 हजार प्लास्टिक फैक्ट्री हैं। इनका वार्षिक टर्नओवर 1.5 लाख से दो लाख करोड़ का है, जिसकी देश के उत्पादन में हिस्सेदारी 35-40 फीसदी की है। यह उद्योग संकट का सामना कर रहा है, जिससे एसोसिएशन की सरकार से मांग है कि वह कच्चा माल उपलब्ध कराने में दखल दे। कीमत वृद्धि को लेकर नीति बनाए और वृद्धि वापस ले। एमएसएमई प्लास्टिक कारखानों के लिए कच्चे माल की उपलब्धता के लिए 25 या 35फीसदी कोटा तय करे, जिससे इन पर निर्भर लाखों लोगों की रोजी रोटी पर संकट ना आए। बैंकों से बिना अतिरिक्त सिक्युरिटी के और वर्किंग कैपिटल दें, आर्थिक मदद करें और आयात शुल्क में कमी करें। नहीं तो एक महीने का ही छोटी कंपनियों के पास कच्चा माल है, उसके बाद इकाइयां बंद हो जाएंगी।

50 फीसदी छोटे कारखाने हो गए बंद

जीएसपीएमए के सदस्य भरत पटेल ने कहा कि गुजरात की 85 फीसदी प्लास्टिक इंडस्ट्री एमएसएमई है, उसमें से भी 60 फीसदी स्मॉल और माइक्रो है जिसमें 50 फीसदी बंद हो चुकी हैं। इनकी संख्या करीब 15 हजार से 18 हजार के बीच है। यदि एक महीने युद्ध और चला तो कच्चे माल की कीमतें दोगुनी हो जाएंगी। इसलिए सरकार को मदद को आगे आना चाहिए।

जीएसटी 5 फीसदी करे सरकार, ब्याज में भी दे राहत

जीएसपीएमए के पूर्व अध्यक्ष शैलेष पटेल ने कहा कि सरकार प्लास्टिक उद्योग की 18 फीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी करे, ब्याज में राहत दे, ब्याज में राहत दे और कच्चे माल की कीमत पर कंट्रोल लाए।

पैकेजिंग, हेल्थ, कृषि सहित 7 उद्योगों पर असर

प्लास्टिक भारतीय अर्थव्यवस्था की अहम कड़ी है और यदि इसे संकट से नहीं उबारा तो जनता की जेब पर भारी बोझ पड़ेगा। इसका असर पैकेजिंग, कृषि, स्वास्थ्य, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लॉजिटिक्स, ऑटोमोबाइल्स, हॉस्पिटल एसेसरीज पर भी पड़ेगा।