अहमदाबाद. शहर के सिविल अस्पताल में एक पिता ने अपने जवान बेटे की मौत जैसी सबसे बड़ी विपदा के बीच भी मानवता का ध्यान रखा। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए भावनगर के 22 वर्षीय हिरेन कंटारिया के ब्रेनडेड घोषित होने के बाद उनके पिता ने अंगदान की सहमति दी। इस निर्णय से तीन मरीजों को नया जीवन मिला।मृत बेटे के अंग अब दूसरों में जीवित रहेंगे। गत 27 मार्च को हिरेन की बाइक दुर्घटनाग्रस्त होने से यह युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गया था। गहन उपचार के लिए उसे अहमदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया। इस बीच सोमवार को डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। इस कठिन घड़ी में सिविल अस्पताल की अंगदान टीम के डॉ. निमेश देसाई और डॉ. मोहित चंपावत ने परिवार को अंगदान का महत्व समझाया। पिता प्रवीण ने अपने पुत्र को खोने के दर्द के बीच भी दूसरों के जीवन को बचाने का संकल्प लिया। बेटे के लिवर और दो किडनी का दान किया गया। इन तीन अंगों से जरूरतमंद तीन लोगों को नया जीवन मिलेगा।
अस्पताल में अब तक 770 अंगों का दान
अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश जोशी के अनुसार यह घटना मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत उदाहरण है। पिता ने अपने बेटे को खोने के गहरे दुख में भी दूसरों की जिंदगी की परवाह की। उनका यह निर्णय समाज को अंगदान के महत्व और मानवता की शक्ति का संदेश देता है। इस घटना के साथ अस्पताल में अब तक 233 ब्रेनडेड मरीजों के 770 अंगों का दान किया जा चुका है। इसके अलावा 192 नेत्रदान और 41 त्वचा दान भी हैं।