
Ahmedabad News देश में केन्द्रीय डाटा प्रोटेक्शन लॉ की जरूरत : सेन
अहमदाबाद. भारतीय रिजर्व बैंक RBI (आरबीआई) के पूर्व कार्यकारी निदेशक Sudarshan Sen सुदर्शन सेन ने कहा कि भारत में डाटा बहुत अहम है। ऐसे में बहुत जरूरी है कि देश के अंदर एक केन्द्रीय data protection law डाटा प्रोटेक्शन कानून (लॉ) हो। अभी अलग अलग नियमन संस्थाएं अपने हिसाब से डाटा प्रोटेक्शन का काम कर रही है, लेकिन वह सिर्फ रेग्युलेशन है, ना ही केन्द्रीय कानून। हमें जरूरत है केन्द्रीय कानून की ताकि कोई भी कंपनी, व्यक्ति या संस्था व्यक्ति की मंजूरी के बिना उसके व्यक्तिगत डाटा का उपयोग ना कर सके।
सेन रविवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गांधीनगर IIT Gandhinagar (आईआईटी गांधीनगर) के वार्षिक तकनीकी सम्मेलन Amalthea 2019 अमल्थिया २०१९ के दौरान हुए Conclave कॉन्क्लेव के दौरान अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। 'फिनटेक एंड इट्स रेग्युलेशन' Fintech and it's regulation विषय पर उन्होंने कहा कि डाटा प्रोटेक्शन लॉ में हमें डाटा क्या है, उसकी एक सरल और समावेशी परिभाषा सुनिश्चित करनी होगी। उसमें व्यक्ति की निजता को केन्द्र में रखना होगा। व्यक्ति की मंजूरी के बिना और उसकी निजता का ध्यान रखते हुए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कौन से डाटा का उपयोग किया जा सकता है क्योंकि उसका हॉस्पिटल जाने से लेकर खरीददारी, खान-पान, घूमने और बीमा, बैंक ट्रांजेक्शन सभी का डाटा है।
सेन ने कहा कि भारत सरकार (इलैक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट) डाटा प्रोटेक्शन लॉ बनाने में जुटा है। जल्द ही यह देश में लागू होगा। हालांकि उन्होंने सवाल के जवाब में कहा कि हम पहले ही काफी डाटा को खो चुके हैं। ऐसे में हमें यह देखना होगा कि उसका गलत इस्तेमाल कम से कम कैसे हो सके। अभी कनाडा में डाटा प्रोटेक्शन लॉ लागू है।
उन्होंने फायनेंशियल टेक्नोलॉजिकल कंपनियों, स्टार्टअप, इनोवेशन को लोगों की समस्याओं को हल करने के लिहाज से बेहतर बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इन कंपनियों के मामले में सुरक्षा पर भी नजर रखना बहुत जरूरी है।
इससे पहले कॉन्क्लेव में ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर पीटर कुक ने क्रॉस कंट्री इंटलेक्च्युअल कोलोबरेशन पर अपने विचार व्यक्त किए। उसके बाद डीआरडीओ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस.क्रिस्टोफर ने भारतीय वायुसेना की ताकत को बढ़ाने वाले 'नेत्र' की खूबी और इसे बनाने से लेकर इसकी उपयोगिता के बारे में बताया। इसके बाद सेक के पूर्व निदेशक एवं इसरो अध्यक्ष के वरिष्ठ सलाहकार तपन मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त किए।
पीएमसी बैंक जैसी घटनाएं रोकने को खुद भी जांच करना जरूरी
सेन ने कहा कि पंजाब एवं महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक के कथित घोटाले का जो मामला सामने आया है, उसमें बैंक की ओर से दी गई रिपोर्ट और ऑडिट की गई रिपोर्ट के विश्वस्त न होने का अहम रोल है। इसके चलते यह सीख लेने की जरूरत है कि आरबीआई और रेग्युलेशन अथोरिटी को बैंकों या ऑडिटर की ओर से दी गई रिपोर्ट पर पूरी तरह से विश्वास करने की जरूरत नहीं है। उन्हें खुद भी जांच करनी चाहिए। संभव हो वहां तक रियल टाइम मॉनीटरिंग का तकनीक की मदद से सिस्टम विकसित करना चाहिए।
Published on:
20 Oct 2019 10:16 pm
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