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गुजरात में 2092 लोगों पर एक चिकित्सक

-दाहोद जिले में एक चिकित्सक के जिम्मे 45 हजार लोग

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Gujarat, Doctor population Ratio

गुजरात में 2092 लोगों पर एक चिकित्सक

गांधीनगर. राज्य सरकार स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्था को लेकर भले कितने ही दावे कर ले, लेकिन वास्तविकता यही है कि आज भी करीब एक चिकित्सक के जिम्मे करीब 29 हजार लोग हैं।

नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (सीएजी) की गत दिनों विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक राज्यभर में चिकित्सकों की कमी करीब 32 फीसदी तक है। योजना आयोग के वैश्विक स्वास्थ्य के तहत आबादी व चिकित्सक के बीच का अनुपात 1 अनुपात 1000 होना चाहिए, लेकिन गुजरात में यह अनुपात 2092 है जो राष्ट्रीय अनुपात से भी कम है। राष्ट्रीय अनुपात 1 अनुपात 1613 है।
कैग रिपोर्ट के मुताबिक चिकित्सकों की भारी कमी का आलम यह है कि दाहोद जिले में एक चिकित्सक पर 45 हजार से ज्यादा लोगों के उपचार की जिम्मेवारी है। ऐसी ही स्थिति आदिवासी बहुल जिलों में दिखती है। छोटाउदेपुर जिले में 31 हजार से ज्यादा लोग सिर्फ एक चिकित्सक के सहारे हैं।
डांग जिले में यह संख्या 25 हजार से ज्यादा, बनासकांठा जिले में 28 हजार से ज्यादा है वहीं पाटण जिले में 30 हजार से ज्यादा लोग एक चिकित्सक पर निर्भर हैं। जामनगर जिले में 22 हजार तथा जूनागढ़ जिले में 25 हजार लोग सिर्फ एक चिकित्सक के भरोसे हैं।
गुजरात के कई जिलों में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) तथा उपकेन्द्रों में चिकित्सकों के साथ-साथ पैरा मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है।
स्वास्थ्य आयुक्त के मुताबिक चिकित्सा अधिकारियों के लिए ओपन इंटरव्यू नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ये चिकित्सक सेवा देने की इच्छा नहीं रखते हैं, इस कारण कुछ पद खाली है।
पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती को लेकर यह बताया गया कि जनवरी 2014 से लेकर अक्टूबर 2016 तक पंचायत सेवा चयन बोर्ड को प्रस्ताव भेजे गए र यह प्रक्रिया विचाराधीन है। हालांकि ऑटि से यह पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग एमबीबीएस व पीजी मेडिकल स्टूडेंट की सेवा का उपयोग में विफल रहा क्योंकि इन सभी को ग्रामीण इलाकों में न्यूनतम दो वर्ष की सेवा जरूरी होती है।
विभाग की ओर से उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्रामीण इलाकों में 2334 विद्यार्थियों की आवश्यकता की जगह सिर्फ 537 विद्यार्थी ही ग्रामीण इलाकों में सेवा के लिए जुड़े। इसके अलावा मुख्यमंत्री सेवा सेतु कार्यक्रम के तहत विभाग के पास ठेके के आधार पर चिकित्सक नियुक्त करने का विकल्प था,लेकिन विभाग ने इसका प्रयास नहीं किया। इस तरह स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा में स्नातक हो रहे मेडिकल विद्यार्थियों की सेवा लेने और चिकित्सकों को नियमित या ठेका आधारित नियुक्ति में भी विफल रहा जिससे गांव के लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

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