
गुजरात में यहां बनेेंगे यूपी बिहार के 10 हजार से ज्यादा श्रमिकों के आवास
अहमदाबाद. केन्द्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध अलंग शिप यार्ड के 10 हजार उत्तर भारतीय श्रमिकों को रहने के लिए आवास मिलेगा। ज्यादातर श्रमिक अलंग शिप ब्रेकिंग यार्ड में काम करने वाले ज्यादातर श्रमिक भावनगर जिले में कच्छ की खाड़ी के पास दस किलोमीटर के तटीय इलाके में रहते हैं। इनमें ज्यादातर श्रमिक बिहार, यूपी, ओडिशा व अन्य राज्यों के हैं।
मांडविया ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि केन्द्र सरकार ने हाल ही में फेरस फंड के तहत 215 करोड़ का फंड का निर्णय लिया है। इसका उपयोग श्रमिकों की कॉलोनी बनाने में होगा। यह निर्णय गुजरात मैरिटाइम बोर्ड और अलंग शिप रिसाइक्लिंग यार्ड एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ संयुक्त बैठक में लिया गया। इसके लिए सुविधा विकसित की जा रही है।
जहाजरानी मंत्रालय की ओर से जारी फंड के तहत गुजरात मैरिटाइम बोर्ड व अलंग शिप रिसाइक्लिंग यार्ड एसोशिएशन की मदद से यार्ड का विकास किया जाएगा। इससे यार्ड में प्लॉट की मालिकी वाली कंपनियों को आईएसओ प्रमाणपत्र प्राप्त करने, प्लॉट को पक्की सतह के लिए मदद देने, फायर फाइटिंग वाटर पाइप लाइन, यार्ड़ में एलपीजी/सीएनजी पाइपलाइन, चहारदीवारी का निर्माण, गटर लाइन, सीवेज ट्रिटमेंट प्लांट, रात्रि में देखने के लिए डिजीटल सुरक्षा कैमरे की व्यवस्था में मदद मिलेगी।
इस फंड का उपयोग श्रमिकों की दुर्घटना में होने वाली मौत के मामले में 5 लाख तक की वित्तीय मदद में की जा सकेगी। इन श्रमिकों की विकलांगता, कॉलोनियों के निर्माण, श्रमिकों की प्रशिक्षण के आधुनिकीकरण व अलंग के ऐतिहासिक वृत्तचित्र में भी काम आएगा।
अलंग दुनिया का सबसे बड़ा शिप ब्रेकिंग यार्ड है जहां पर हर वर्ष सैंकड़ों जहाज टूटते हैं।
नौसेना के पुराने जहाजों को रिसाइकिल किया जाएगा
उन्होंने कहा कि अलंग को ग्रीन शिप रिसाइकिल यार्ड के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में भारतीय नौसेना के पुराने जहाजों को भी यहां रिसाइकिल किया जाएगा।
Published on:
13 Oct 2018 04:04 pm

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