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हर साल देश में 1000 कॉमर्शियल पायलट की जरूरत, आधे भी नहीं मिल रहे

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हर साल देश में 1000 कॉमर्शियल पायलट की जरूरत, आधे भी नहीं मिल रहे

हर साल देश में 1000 कॉमर्शियल पायलट की जरूरत, आधे भी नहीं मिल रहे

नगेन्द्र सिंह

अहमदाबाद. देश में बढ़ रही विमान यात्रियों की संख्या, विमान सेवा को देखते हुए देश में हर साल 1000 नए कॉमर्शियल पायलट की मांग है। लेकिन इनमें से आधे कॉमर्शियल पायलट भी नहीं मिल पा रहे हैं। फिलहाल प्रति वर्ष औसतन 200-300 कॉमर्शियल पायलट ही देश को मिल पा रहे हैं। इसके चलते केन्द्र सरकार की हर आम नागरिक को हवाई सेवा उपलब्ध कराने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है।
दरअसल, केन्द्र सरकार ने वर्ष 2016 में ‘उड़ान’ (उड़े देश का हर आम नागरिक) योजना के तहत क्षेत्रीय स्तर पर द्वितीय और तृतीय श्रेणी शहरों में भी विमान-हेलिकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराने की घोषणा की। इसके तहत 948 रूटों पर विमान-हेलिकॉप्टर सेवा शुरू करने को चिन्हित किया गया है। इसमें दिसंबर 2021 तक 403 रूटों पर विमान-हेलिकॉप्टर सेवा शुरू हुई है। गुजरात में भी कई शहरों के बीच यह सेवा शुरू हुई है।
ऐसे में देश में कॉमर्शियल पायलट की जरूरत बढ़ी है। इसे पूरा करने के लिए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) की ओर से 34 उड़ान प्रशिक्षण संगठन (एफटीओ) को मान्यता दी गई है। जहां विद्यार्थियों को कॉमर्शियल पायलट बनने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जबकि छह एयरक्राफ्ट टाइप ट्रेनिंग संगठन (एटीओ) हैं। जहां इन पायलटों को किसी वाणिज्यिक एयरलाइन में पायलट की नौकरी पाने के लिए जरूरी विमान टाइप रेटिंग व अन्य प्रशिक्षण दिया जाता है।

महंगी शिक्षा भी बड़ी वजह
जानकारों का कहना है कि कॉमर्शियल पायलट बनने का प्रशिक्षण काफी महंगा है। यह मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी काफी मुश्किल है, क्योंकि इस कोर्स को करने में 25 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च होता है। भौतिक विज्ञान और गणित विषय के साथ 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी इस कोर्स को कर सकते हैं। इसके लिए 200 घंटे का विमान उड़ाने का प्रशिक्षण जरूरी है। प्रति घंटे का खर्च ही करीब 11 हजार से ज्यादा होता है। ऐसे में इसका खर्च 22 लाख तक हो जाता है। अन्य कोर्स, भोजन और रहने का खर्च अलग से होता है। गुजरात सरकार आरक्षित वर्ग (एससी) के विद्यार्थियों को 4 प्रतिशत ब्याज पर 25 लाख का ऋण उपलब्ध कराती है।

पांच सालों में 3376 को कॉमर्शियल पायलट का लाइसेंस
देश में 5 सालों में 3376 लोगों को कॉमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी हुए हैं। इसमें देश में प्रशिक्षण लेने वाले पायलट की संख्या 2042 है। जबकि 1334 लोगों ने विदेश के प्रशिक्षण संगठनों से प्रशिक्षण प्राप्त कर भारत में लाइसेंस पाया है। 2017 में देश में कुल 552, 2018 में 640, 2019 में 744, 2020 में 578 और 2021 में 862 लोगों को कॉमर्शियल पायलट के लाइसेंस जारी किए गए हैं। इसमें भारतीय और विदेशी उड़ान प्रशिक्षण संगठनों से प्रशिक्षण पाने वाले दोनों ही लाइसेंस धारक शामिल हैं।

छह महीने में गुजरात की दो युवतियां बनीं पायलट
बीते छह महीने में गुजरात से दो युवतियां कॉमर्शियल पायलट बनी हैं। इसमें गत वर्ष दिसम्बर में वडोदरा की खुशबू परमार (28) और सितम्बर में सूरत के ओलपाड की मैत्री पटेल (19) भी शामिल है। मैत्री ने अमरीका में ट्रेनिंग ली।

देश में बीते 5 सालों में जारी पायलट लाइसेंस
वर्ष भारतीय एफटीओ विदेशी एफटीओ
2017- 358- 194
2018- 415- 225
2019- 430- 314
2020- 335- 243
2021- 504- 358
(स्त्रोत: लोकसभा में पेश आंकड़े)

ट्रेनिंग स्कूल बनाने के नियमों में राहत की जरूरत
देश में इसके ट्रेनिंग स्कूलों की कमी है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। ऐसे स्कूलों को शुरू करने के लिए काफी नियम हैं। कई मंजूरियां लेनी होती हैं। काफी बड़ा निवेश करना होता है। यदि स्कूल शुरू करने के नियमों में कुछ राहत दी जाए, तो देश के अंदर ही पर्याप्त संख्या में पायलट तैयार हो सकते हैं। गुजरात में महेसाणा में एक स्कूल है और हाल ही में अमरेली में एक और ट्रेनिंग स्कूल को मान्यता दी गई है।
-कैप्टन (सेवानिवृत्त) अजय चौहान, निदेशक, सिविल एविएशन, गुजरात