आंख तिरछी होने के साथ साथ मायोपिया होने का भी बढ़ जाता है खतरा-अध्ययनों में भी हुई है पुष्टि
अहमदाबाद. मोबाइल पर ऑनलाइन पढ़ा़ई की शुरूआत के साथ ही बच्चों की आंख संबंधित समस्याएं बढऩे लगी है। पिछले कुछ दिनों से आंख अस्पतालों का अभिभावकों का संपर्क बढ़ गया है। प्रारांभिक समस्याओं में बच्चों की आंख में दर्द, चश्मा लगवाना या नंबर की जांच आदि हैं। चिकित्सकों का कहना है कि कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल का ज्यादा उपयोग करने पर आंखों में पानी आना, सूखापन, सिरदर्द जैसीी समस्याएं बढ़ती हैं। इसके अलावा आंखों में दूर की दृष्टि कमजोर (मायोपिया) और आंखों में तिरछापन भी हो सकता है।
कोरोना काल में अब स्कूली पढ़ाई में भी बदलाव आया है। स्कूलों की ओर से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है। नेत्र विशेषज्ञों की मानें तो ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। ऐसे में बच्चों को समय समय पर रेस्ट लेने की जरूरत है। चिकित्सकों का सुझाव है कि हर 40 मिनट में 20 मिनट का रेस्ट जरूरी है। भारत समेत देश विदेश में कई अध्ययन हुए हैं जिसमें मोबाइल पर ज्यादादेर बैठने से आंखों को नुकसान होता है।
ऑनलाइन पढ़ाई से नुकसान
- ऑनलाइन पढ़ाई से उन बच्चों को काफी परेशानी हो सकती है जिन्हें आंख का नंबर तो है लेकिन उसके बारे में पता नहीं है। यदि इस तरह के बच्चे मोबाइल और लैपटॉप के सामने ज्यादा वक्त तक रहते हैं तो आंखों में तिरछापन आने की पूरी आशंका होती है।
-आम बच्चों के लिए ज्यादा वक्त तक मोबाइल पर पढ़ाई से से दूर की दृष्टि कमजोर होना (मायोपिया) , आई ड्राई, बार-बार पानी आना, सिरदर्द आदि की समस्या हो सकती है।
- आंखों में बार-बार पानी आने, ड्राई आंख का रहना तथा चुभन जैसी समस्याओं को नजर अंदाज करने पर आंख में संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
-ऑनलाइन पढ़ाई से सामाजिक समस्या भी बढ़ रही है। हरेक बच्चे के लिए मोबाइल फोन उपलब्ध हो यह जरूरी नहीं
बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाइ के सुझाव
- पांच वर्ष तक के बच्चे को मोबाइल एवं लैपटॉप जैसे उपकरण का उपयोग नहीं करवाया जाना चाहिए
- पांच वर्ष से दस वर्ष के बच्चे को 24 घंटे में दो घंटे तक मोबाइल और लैपटॉप पर पढ़ाई करवाई जा सकती है जिसमें हर 40 मिनट में 20 मिनट का विश्राम करना जरूरी है।
-10 से 15 वर्ष तक के बच्चों के लिए तीन घंटे से ज्यादा मोबाइल पर पढ़ाई नहीं की जानी चाहिए। इस अवधि में भी हर 40 मिनट के बाद 20 मिनट का आराम लेना चाहिए।
-15 वर्ष से अधिक आयु वाले पांच घंटे तक मोबाइल पर पढ़ाई कर सकते हैं। हालांकि उन्हें भी हर 40 मिनट में 20 मिनट के आराम की जरूरत है।
-समय समय पर आंख की जांच करना जरूरी
बच्चों की आंख जांच के लिए आने लगे हैं अभिभावक
ऑनलाइन पढ़ाई की शुरूआत ही हुई है। ऐसे में कुछ अभिभावकों ने अपने बच्चों की आंखों में होने वाली समस्या के लिए संपर्क भी करना शुरू कर दिया है। पिछले दिनों कई अभिभावकों ने बच्चों की आंख संबंधित समस्याओं से अवगत कराया। कई बार ऐसा होता है कि पढ़ाई के दौरान नेटवर्क की कमी से भी बच्चों को घंटे तक अनावश्यक कंप्यूटर और मोबाइल के साथ बैठना पड़ता है। यह आंखों के लिए खतरा है। इससे बच्चों में चिड़चिड़ापन की भी समस्या रहती है।
डॉ. सोमेश अग्रवाल, रेटीना विभागाध्यक्ष, एम. एड जे. इंस्टीट्यूट ऑफ्थरमॉलोजी
मोबाइल पर उचित ब्राइटनेस का होना जरूरी
कभी कभी बच्चे अंधेरे में मोबाइल फोन लेकर बैठ जाते हैं। इससे आंखों पर विपरीत असर पड़ता है। मोबाइल और लैपटॉप जैसे उपकरण की उचित ब्राइटनेस होनी जरूरी है। अंधेरे में मोबाइल के उपयोग से आंखों में खिंचाव आता है। स्कूलों प्रबंधकों को भी बच्चों की आयु के हिसाब से ऑनलाइन पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
डॉ. हंसा ठक्कर, निदेशक सरकारी आंख अस्पताल अहमदाबाद