अस्वीकृत आवेदनों पर पुनर्विचार व लंबितों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग विश्व आदिवासी दिवस आज
अहमदाबाद. गुजरात में 91183 आदिवासी लोग वन भूमि अधिकार से वंचित हैं। इस अधिकार की एवज में आवेदन करने वालों में से 49.8 फीसदी लोगों को यह लाभ मिलेगा ही नहीं। 57054 आवेदनों को खारिज कर दिया गया और 34129 आदिवासियों के आवेदन लंबित हैं। गुजरात प्रदेश कांग्रेस की ओर से ये आरोप लगाए। बुधवार को विश्व आदिवासी दिवस है। कांग्रेस ने मांग की है कि अस्वीकृत आवेदनों पर पुनर्विचार किया जाए और लंबितों पर शीघ्र निर्णय हो।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह कठवाडिया ने राज्यसभा के आंकड़ों के हवाले से कहा कि भले ही आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है लेकिन आंकड़ों को देखें तो आदिवासियों को वन भूमि से वंचित किया जा रहा है। राज्यसभा में गत फरवरी माह में दिए गए आंकड़ों को देखें तो राज्य में आदिवासियों की स्थिति का पता चल जाएगा। प्रवक्ता कठवाडि़या का आरोप है कि सरकार की ओर से भले ही आदिवासियों के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं की जा रही हैं लेकिन जब अधिकार देने की बात आती है तो उन्हें लाभ से वंचित कर दिया जाता है। आरोप लगाया कि गुजरात में 16000 हेक्टेयर से अधिक भूमि का उपयोग गैर-वन उपयोग के लिए किया गया है। अम्बाजी से लेकर उमरगाम तक के गरीब आदिवासियों को अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।सरकार को गुजरात के गरीब आदिवासी समुदाय के वन भूमि अधिकारों के अस्वीकृत आवेदनों पर पुनर्विचार करना चाहिए। मांग है कि सरकार वन भूमि अधिकार के लंबित आवेदनों पर तत्काल निर्णय लिया जाए।