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पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने से कोई लाभ नहीं : नितिन पटेल

केन्द्र जब एक्साइज ड्यूटी कम करेगा, तभी पेट्रोल-डीजल के दाम कम होंगे

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No profit on inclusion of petrol-diesel in GST: Nitin Patel

गांधीनगर. राज्य के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने से कोई लाभ नहीं मिलेगा। राज्य विधानसभा में शुक्रवार को बजट पर वित्त विभाग की मांगों को लेकर चर्चा के बाद जवाब में उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार जब तक एक्साइज ड्यूटी कम नहीं करेगी, तब तक राज्य में पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं होंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि जीएसटी काउंसिल के बैठक में सभी राज्यों के वित्त मंत्री इस बात पर एकमत थे कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।
वित्त मंत्री ने विपक्ष की इस मांग पर सवाल किया कि विपक्ष उन्हें यह बताए कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल करने के क्या लाभ हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को पेट्रोल-डीजल से अच्छा खासा राजस्व मिलता है। यदि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी में शामिल किया जाता है तो राज्यों को 50 फीसदी आय केन्द्र सरकार को देनी पड़ेगी। इसलिए राज्य सरकार पेट्रोल-डीजल से होने वाली आय को केन्द्र के पास नहीं जाने देना चाहती हैं।

राज्य के सार्वजनिक कर्ज में हो रही कमी

विपक्ष के राज्य पर सार्वजनिक कर्ज के आरोपों का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सार्वजनिक कर्ज में कमी हो रही है। पहले राज्य में वर्ष 2004-05 में राज्य के घरेलू उत्पादन के मुकाबले सार्वजनिक कर्ज 28.48 फीसदी था जो वर्ष 2016-17 में घटकर 17.21 फीसदी रह गया जिसके वर्ष 2018-19 में घटकर 15.69 फीसदी रहने की उम्मीद है।
राज्य का कुल सार्वजनिक कर्ज 1 लाख 92 हजार करोड़ है वहीं वहीं राज्य की कुल प्रति व्यक्ति आय 1.53 लाख रुपए हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने गत 14 वर्ष से ओवरड्राफ्ट नहीं लिया। सरकार ने पिछले डेढ़ दशक से वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि सार्वजनिक कर्ज विवेकपूर्ण सीमा होना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के वंचितो, जरूरतमंद लोगों को ध्यान में रखकर राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए सार्वजनिक कर्ज लेती है जो नियम के हिसाब से काफी कम है।
राज्य का बजट 1 लाख 83 हजार 666 करोड़ है। इसमें विकासलक्षी खर्च 1 लाख 11 हजार 565 करोड़ का प्रावधान रखा गया है वहीं गैर विकासलक्षी खर्च में 70,012 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। इस बजट में विकासलक्षी खर्च गैर विकासलक्षी खर्च के मुकाबले डेढ़ गुणा है।